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Religion
दुव्र्यसनों से जीवन नर्क बन जाता है: साध्वीश्री

 

बीकानेर । जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की वरिष्ठ साध्वी विचक्षण ज्योति, प्रज्ञा भारती, महामांगलिक प्रदात्री, प्रवर्तिनी साध्वी चन्द्र प्रभा का रोग, शोक, दोष के निवारण के लिए अप्रेल रविवार को आसानियों के चौक के सूरज भवन महामांगलिक कार्यक्रम  हुआ। सिद्घ मंत्रोच्चारण से साध्वीजी ने सबके मंगल,  हित तथा उत्तम स्वास्थ्य तथा प्रगति की प्रार्थना की। महामांगलिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया। अनेक श्रद्घालु राजस्थान व देश के विभिन्न नगरों से आए थे। महामांगलिक कार्यक्रम में साध्वीजी ने प्रवचन में कहा कि धार्मिक, सांसारिक व पारिवारिक कार्यों में परिवार को सहभागी बनाए तथा दुव्र्यसनों से बचते हुए जीवन को सफल बनावें। सद्मार्ग पर चलते हुए नर को नारायण बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है कब यह जीवन समाप्त हो जाए। जीवन को संभल कर वीतराग प्रभु को समर्पित करते हुए जीए। दुव्र्यसनों से जीवन नर्क बन जाता है। दुव्यसनों को छोड़कर सुखमय व आनंदमय जीवन जीए। अपने आत्म स्वरूप को उज्जवल, उन्नत व स्वच्छ बनाएं । उन्होंने महामांगलिक की शुरुआत नवंकार महामंत्र के धुन से करवाई। उन्होंने नवग्रह शांति के मंत्रों सहित अनेक देव, गुरु व सिद्घ पुरुषों द्वारा सिद्घ किए मंत्रों का उच्चारण किया। विचक्षण महिला मंडल व साध्वी संयमपूर्णा ने मंगलाचरण किया। साध्वी चंदन बाला ने भी प्रवचन किए। सुश्री ऋतु कोठारी ने साध्वीवृंद का परिचय व महामांगलिक की जानकारी दी।  श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा ने आभार व्य?त किया।  दो वर्षीतप के तपस्वी वर्षी विजय चंद पारख व वर्षीतप का पारणे का लाभ लेने वाले व पांच दिवसीय महोत्सव में विभिन्न आयोजनों में भागीदारी करने वाले श्रावक-श्राविकाओं के समर्पण व श्रद्घा की अनुमोदना करते हुए उनका अभिनंदन किया गया। चातुर्मास व्यवस्था समिति के संयोजक ओम सुराणा व गेवरचंद मुसरफ ने बताया कि साध्वीजी की निश्रा में ही रविवार को ही नाहटा चौक के आदिनाथ मंदिर में सामूहिक स्नात्र पूजा से पांच दिवसीय उत्सव शुरू हुआ।  साध्वीश्री विचक्षणजी महाराज के जन्म शता?दी वर्ष व पुण्यतिथि पर श्री संकल श्रीसंघ के सहयोग से आयोजित पांच दिवस महोत्सव के महोत्सव के दूसरे दिन 23 अप्रेल को अहम से अर्हम बनाने का दिवस मनाया जाएगा। इस दिन दोपहर एक बजे श्रीरत्नत्रय पूजन, महोत्सव मनाया जाएगा तथा अक्षया तृतीया के दिन महोत्सव के तीसरे दिन को जन-जन में वीतराग प्रभु को बसाने वाला दिवस मनाया जाएगा।  अक्षया तृतीया के दिन सुबह साढ़े आठ बजे वर्षीतप तपस्वियों की शोभायात्रा निकलेगी तथा सुबह साढ़े सात बजे वर्षीतप पारणे का प्रेरक सांस्कृतिक नाट्य मंचन, तपस्वी अभिनंदन समारोह दोपहर साढ़े बारह बजे व दोपहर डेढ़ बजे श्री आदिनाथ पंच कल्याणक पूजा का आयोजन नाहटा मोहल्ले के कुशल भवन में होगा। महोत्सव का चौथा दिन 25 अप्रेल को अशुद्घ से शुद्घ बनाने का दिवस मनाया जाएगा। इस दिन दोपहर साढेे बारह बजे 108 जोड़ों द्वारा श्रीसिद्घ चक्रम महापूजन दोपहर साढ़े बारह बजे होगा। महोत्सव का पांचवा दिन 26 अप्रेल को भक्त को भगवान बनाने वाले दिवस के ेरूप में मनाया जाएगा। इस दिन सुबह नौ बजे सामूहिक सामायिक व गुणानुवाद, दोपहर बारह बजे सामूहिक आयम्बिल व दोपहर डेढ़ बजे दादा गुरुदेव की बड़ी पूजा का आयोजन होगा। महोत्सव के दौरान प्रति दिन आदिश्वरजी सहित मंदिरों में अंगी रचना, सुबह साढ़े नौ से साढ़े दस बजे तक प्रवचन, एक सौ ल?की ड्रा, सांस्कृतिक नाट्य मंच, जीवदया व अनुकंपा महादान आदि का आयोजन होगा। सभी आयोजनों में सकल श्रीसंघ, श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट, विचक्षण महिला मंडल व स्थानीय मंडलों का सम्पूर्ण सहयोग रहेगा।