15 दिवसीय बीकानेर आर्ट एंड कल्चर फेस्टिवल का हुआ भव्य समापन

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लोकायन संस्थान द्वारा राजस्थान कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित हुए पंद्रह दिवसीय ‘बीकानेर थिएटर आर्ट एंड कल्चर फेस्टिवल ‘कला रंग राग’ का समापन शनिवार को हुआ. समापन अवसर पर पांच से अधिक संवाद, थिएटर के अलावा 10 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई.
लोकायन के सचिव गोपाल सिंह चौहान ने जानकारी दी कि फेस्टिवल के अंतिम दिन सुबह 10 बजे बीकानेर के प्रशिद्ध लक्ष्मी नाथ मंदिर में होने वाले हरजस के भजनो की प्रस्तुति हुई. लक्ष्मी नाथ मंडल के कांता जोशी, प्रेमलता पनिया, सरस्वती आचार्य द्वारा भगवान कृष्ण एवं मीरा के भजनों की प्रस्तुति दी गयी. इसके पश्चात बीकानेर के वरिष्ठ वाणी गायक शिवजी एवं बद्री सुथार द्वारा निर्गुण भजनों का आयोजन हुआ. नाट्य संवाद श्रृंखला में सुबह 11 बजे “वूमेन इन थिएटर” विषय पर मुंबई की थिएटर कलाकार नेहा सिंह, शर्मिष्ठा शाह एवं सरवरी लहाड़े ने रंगकर्म में महिला कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की.  अपराह्न के कार्यक्रमों में “सृजन के सरोकार” “भूले बिसरे स्वाद” के अलावा ‘कला एवं संस्कृति तथा सी एस आर” विषय पर आर ए एस अधिकारी शिप्रा शर्मा एवं वेदांता कंपनी के ध्रूब नारायण ने अपने विचार व्यक्त किये। इसके पश्चात “कला संवाद” के तहत कला आलोचक डॉ राजेश कुमार व्यास के साथ चंद्र कुमार पुरोहित ने ‘कला आलोचना में भारतीय दृष्टि’ विषय पर संवाद आयोजित हुआ.
समापन समारोह की शुरुआत शाम को 6 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई जिसमे पहली प्रस्तुति जामसर के लोक गायक नत्थू खान एवं बाबू खान द्वारा दी गयी. शाम को 7 बजे जैसलमेर के प्रशिद्ध लोक गायक दापू खान द्वारा विशेष प्रस्तुति दी गयी जिसमे दापू खान ने अपने प्रशिद्ध लोक गीत “मूमल” से कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके पश्चात दापू खान ने ‘मारगिया बुहारूं’ ‘रिमझिम बरसे मेह’ जैसे लोक गीतों की प्रस्तुति दी.
शाम 7:30 बजे बीकानेर के लोक गायक लालचंद उपाध्याय तथा शंकर व्यास ने भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोहा। फेस्टिवल का समापन देश के प्रशिद्ध युवा बैंड “कबीर कैफे” द्वारा दी गयी विशेष कबीर भजनों से हुआ. कबीर कैफ़े ने कार्यक्रम की शुरुआत कबीर के पप्रशिद्ध भजन “चदरिया झीनी रे झीनी” से की. इसके पश्चात कबीर कैफ़े बैंड के मुख्य गायक नीरज आर्या ने ‘मुनिया पिंजरे वाली’ ‘घट घट में पंछी बोलता है’ एवं हाल ही मे प्रचलित हुआ उनका भजन ‘मत कर माया को अहंकार’ की भी प्रस्तुति दी.
फेस्टिवल से जुड़े नवल किशोर व्यास ने जानकारी दी कि इस पंद्रह दिवसीय फेस्टिवल में कला एवं थिएटर से सम्बंधित 30 से अधिक संवाद, 100 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम, 360 डिग्री वर्चुअल टूर तथा देश के प्रशिद्ध 50 कलाकारों की पेंटिंग्स की 360 डिग्री वर्चुअल कला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया. फेस्टिवल को आयोजित करने में पुनीत जाजड़ा, दीपांशु तिवारी, विकास शर्मा, गिरिराज पुरोहित, निकिता तिवारी, ओमप्रकाश, गोपाल बिस्सा, नवल किशोर दवे की मुख्य भूमिका रही.

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