बीकानेर । चुनावी दौर में सियासी दावं-पेच आम बात है। पहले टिकट के समीकरण बिठाने पड़ते हैं, फिर जीत के। सियासत के इस सफर में उन प्रत्याशियों को हर मोड़ पर चुनौती का सामना करना पड़ता है, जो जीत के ख्वाब देखते हैं। नामांकन भरने की तिथि गुजरने के बाद अब चुनावी घमासान में बगावत करने और निर्दलीय मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों की मान-मनौव्वल का दौर शुरू हो गया है। बीकानेर के चुनावी दंगल में भी नामांकन वापसी तिथि गुरुवार दोपहर तक जनाधार वाले बागी नेताओं को मैदान से हटाने के लिये सियासी उठापटक तेज हो गई है। किसी पर सामाजिक दबाव बनाया जा रहा है तो किसी को रिश्तों की दुहाई देकर मैदान छोडऩे के लिए मनाया जा रहा। भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकार बागी नेताओं से भी संपर्क किया जा रहा है। दिग्गज बागी अब तक अपने फैसले पर अडिग दिख रहे हैं। हालांकि, गुरुवार शाम को यह तस्वीर पूरी तरफ से साफ होगी कि सियासी रण में कौन-कौन योद्धा होंगे। आपको बता दें कि बीकानेर जिले की सात सीटों में से छह सीटों पर इस बार दमदार बागी चुनावी मैदान में उतरे हुए है। इनमें बीकानेर पूर्व और पश्चिम से कांग्रेस के कद्दावर नेता गोपाल गहलोत, बीकानेर पूर्व से भाजपा के प्रभावशाली नेता युधिष्ठर सिंह भाटी, नोखा विधानसभा सीट पर उप जिला प्रमुख इंदु तर्ड और मेघसिंह राजपूत, श्रीडूंगरगढ़ में विधायक किशनाराम नाई, लूणकरणसर में प्रभुदयाल सारस्वत, खाजूवाला में डॉ. ललित कुमार सिंगारिया शामिल है। इन दमदार दावेदारों की मौजूदगी से पांचों सीटों पर भाजपा-कांग्रेस के वोटों का समीकरण बिगड़ता नजर आ रहा है। बागाी उम्मीदवारों का मान मनौव्वल के दौर में बुधवार को भाजपाई रणनीतिकारों ने श्रीडूंगरगढ़ के चुनावी मैदान में विधायक किशनाराम नाई की नाराजगी दूर करने के लिये उनके फार्म हाउस पर पहुंचे, लेकिन किशनाराम ने उन्हे खास तरजीह नहीं दी। जानकारी में रहे कि किशनाराम नाई श्रीडूंगरगढ़ में भाजपा के लिये बड़ा खतरा बने है। वहीं नोखा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी प्रत्याशी बनकर मैदान में उतरी नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी की भानजी इंदु तर्ड और उनके परिजनों की मान-मनौव्वल कर उन्हे नामांकन वापसी के लिये राजी करने के लिये कांग्रेसी रणनीतिकारों ने अपनी समूची ताकत झोंक रखी है। नोखा में इंदु तर्ड कांग्रेस के लिये बड़ा खतरा मानी जा रही है। इधर, बीकानेर पूर्व और पश्चिम सीट से दमदार उम्मीदवार के रूप में मौजूद गोपाल गहलोत ने एक बार फिर दोहराया कि मैं पूर्व सीट से कांग्रेस का प्रबल दावेदार था। पार्टी ने टिकट बांटने के नाम पर इतना मंथन किया, लेकिन खोदा पहाड़ और निकली चूहिया। उन्होने कहा कि कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार अब हायतौबा मचाते घूम रहे है, लेकिन मैं अपना फैसला बदलने वाला नहीं हूं। खाजूवाला से बागी बनकर मैदान में उतरे डॉ. ललित सिंगारिया ने कहा कि मैं किसी पार्टी का बागी नहीं हूं, बल्कि खाजूवाला को पिछड़ेपन से उबारने के लिये मैदान में उतरा हूं। मैं किसी प्रत्याशी के पक्ष में बैठने या नामांकन वापस लेने वाला नहीं हूं।

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