राजस्थान में 600 करोड़ के कारोबार पर पड़ेगा असर , जानिए वजह

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जयपुर: केंद्र की किसान नीतियों के विरोध में प्रदेश की अनाज मंडीयां बंद हैं. सभी 247 अनाज मंडियों में कामकाज नहीं होगा. सोमवार को राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ और विभिन्न किसान संघों ने बंद के समर्थन में मंडियां बंद करने का निर्णय लिया है. एक दिन मंडी बंद रहने से 600 करोड़ रुपए के कामकाज पर असर रहेगा. साथ ही 5 लाख से अधिक मंडी कामगार प्रभावित होंगे. केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में 23 सितंबर को फिर से बैठक बुलाई जाएगी. जिस पर आगे की रणनीति पर मंथन होगा.

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कोरोना संक्रमण में कारोबार चलाना लोहे के चने चबाने जैसा है, इस बीच में अगर कामकाज हड़ताल, विरोध और प्रदर्शन की भेंट चढ़ जाए तो समझे अच्छे दिनो का इंतजार लंबा है. राजस्थान सहित देशभर के अनाज मंडी कारोबारियों के लिए इन दिनों यह स्थिति दुविधा और भावी आशंकाओं से भरी है. आज प्रदेश की 247 अनाज मंडियों ने कामकाज बंद रखकर अपने विरोध को दर्शा रहे हैं. इनका विरोध कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य  विधायक-2020 के प्रावधानों को लेकर है. कारोबारियों का कहना हैं कि जो मंडी यार्ड में काम करते है उन्हें लाइसेंस फीस, मंडी सेस, मंडी फीस, विकास शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क समते केंद्र और राज्य के अन्य टैक्स अदा करने होंगे, लेकिन जो परिसर के बाहर कृषि जिंस का व्यापार करता है उसे लाइसेंस और
अधिकतर शुल्क से मुक्त रखा गया है. यह दोहरा आचरण उन्हें खत्म करेगा और चुनिन्दा कॉर्पोरेटर्स के हाथों में कारोबार की लगाम देगा. इससे अकेले राजस्थान के 13 हजार कारोबारी चार लाख कामगार जिनमे श्रमिक, मुनीम सहित परिवहन से जुड़े तमाम दिहाड़ी लोग शामिल है बेरोगजारी का सामना करेंगे.

किसान मण्डी में माल लाकर बेचने में खुश हैं. परन्तु भारत सरकार के अध्यादेश 05-06-2020 के द्वारा मण्डियों के बाहर मण्डियों में लगने वाला मण्डी फीस जो वर्तमान में गेहूँ, धान, जौ, दलहन, मसाले तथा कपास पर 1.60 प्रतिशत; तिलहन पर 1 प्रतिशत; तथा ज्वार, मक्का, बाजरा तथा जीरा व ईसबगोल पर 0.50 प्रतिशत देय हैं और इसके साथ कृषक कल्याण फी 1 प्रतिशत देय हैं; को समाप्त कर दिया है. इसलिये मण्डी में कृषि जिन्स के क्रय विक्रय पर भी मण्डी फीस तथा कृषक कल्याण फीस समाप्त करनी चाहिये. पर चूंकि मण्डियों के मेन्टीनेन्स, प्रशासनिक खर्च तथा वांछित आवश्यक विकास के लिये धन की आवश्यकता होगी. इसके लिए आठ विकल्प राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ की ओर से दिए गए हैं.

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