9वीं बैठक भी बेनतीजा: 15 जनवरी को फिर मिलेंगे किसान और सरकार

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9वीं बैठक भी बेनतीजा: 15 जनवरी को फिर मिलेंगे किसान और सरकार mr bika fb post

सरकार के साथ किसानों की 9वें दौर की बातचीत बेनतीजा रही। किसानों ने तल्ख लहजे में सरकार से कहा कि आप हल निकालना नहीं चाहते हैं। अगर ऐसा है तो हमें लिखकर बता दीजिए, हम चले जाएंगे। इस बैठक में किसान तख्ती लगाकर बैठे थे। इस पर लिखा था- मरेंगे या जीतेंगे। किसानों और सरकार के बीच अगली बैठक 15 जनवरी को होगी।

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9वें दौर की बैठक के बाद 2 चीजें तय

1. किसानों को कानून वापसी से कम कुछ मंजूर नहीं

आंदोलन के 44वें दिन सरकार और किसानों के बीच विज्ञान भवन में बातचीत चल रही थी। ऑल इंडिया किसान सभा ने कहा, ‘बैठक का माहौल गर्म था। हमने कह दिया है कि कानून वापसी के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। हम किसी कोर्ट में नहीं जाएंगे। कानून वापस लो, नहीं तो हमारी लड़ाई चलती रहेगी। 26 जनवरी को हमारी परेड होगी।’

किसान नेता बलबीर राजेवाल ने मंत्रियों से कहा, ‘आप जिद पर अड़े हैं। आप अपने-अपने सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी को लगा देंगे। नौकरशाह कोई न कोई लॉजिक देते रहेंगे। हमारे पास भी लिस्ट है। फिर भी आपका फैसला है, क्योंकि आप सरकार हैं। लोगों की बात शायद कम लगती है। जिसके पास ताकत है, उसकी बात ज्यादा होती है। इतने दिनों से बार-बार इतनी चर्चा हो रही है। ऐसा लगता है कि इस बात को निपटाने का आपका मन नहीं है। तो वक्त क्यों बर्बाद करना है।’

2. सरकार कानून वापसी के अलावा कोई विकल्प चाहती है

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश के सामने किसानों ने कृषि कानून रद्द करने की मांग दोहराई, लेकिन कृषि मंत्री ने साफ इनकार कर दिया। बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ‘कानूनों पर चर्चा की कोशिश की गई, पर कोई फैसला नहीं हो पाया। हमने किसानों से कहा कि वो कानून वापसी के अलावा कोई विकल्प हमें दें तो हम विचार को तैयार हैं, लेकिन हमें कोई विकल्प नहीं दिया गया। इसके बाद 15 जनवरी को बैठक का फैसला किया गया।’

मध्यस्थ बना डेरा नानकसर, नया रास्ता निकालने की कोशिश
डेरा नानकसर के मुखी बाबा लक्खा सिंह ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से गुरुवार को एक मीडिएटर (मध्यस्थ) के तौर पर मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने बाबा लक्खा सिंह को बताया कि सरकार अब एक प्रस्ताव तैयार कर रही है, जिसमें राज्य सरकारों को कृषि कानून लागू करने या न करने की छूट दी जाएगी। डेरा नानकसर भी किसान आंदोलन में शामिल है।

बाबा लक्खा सिंह ने बताया- करीब पौने दो घंटे हुई चर्चा में मैंने कृषि मंत्री से सवाल पूछा कि आप की बात किसी नतीजे पर खत्म नहीं होती तो क्या उन राज्यों को कानूनों से बाहर रख सकते हैं, जिनमें काफी विरोध है। इस पर तोमर ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर किसानों से बात करने को तैयार हैं। जो राज्य कानून को लागू करना चाहें, वे करें और जो नहीं चाहते वे नहीं करें। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि आज किसानों के साथ हुई बैठक में सरकार ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की है या नहीं।

कल पंजाब भाजपा के नेता अमित शाह से मिले थे

पंजाब में भाजपा नेताओं के घेराव और हमले को लेकर पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह ज्याणी और हरजीत सिंह ग्रेवाल ने गुरुवार रात को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता जताई। पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा पर हमला हुआ, फिर पूर्व मंत्री तीक्ष्ण सूद के घर पर लोगों ने ट्रॉली भर गोबर फेंक दिया था।

पिछली 8 में से सिर्फ 1 बैठक का नतीजा निकला
पहला दौरः 14 अक्टूबर
क्या हुआः मीटिंग में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह कृषि सचिव आए। किसान संगठनों ने मीटिंग का बायकॉट कर दिया। वो कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे।

दूसरा दौरः 13 नवंबर
क्या हुआः कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ मीटिंग की। 7 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

तीसरा दौरः 1 दिसंबर
क्या हुआः तीन घंटे बात हुई। सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन किसान संगठन तीनों कानून रद्द करने की मांग पर ही अड़े रहे।

चौथा दौरः 3 दिसंबर
क्या हुआः साढ़े 7 घंटे तक बातचीत चली। सरकार ने वादा किया कि MSP से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। किसानों का कहना था सरकार MSP पर गारंटी देने के साथ-साथ तीनों कानून भी रद्द करे।

5वां दौरः 5 दिसंबर
क्या हुआः सरकार MSP पर लिखित गारंटी देने को तैयार हुई, लेकिन किसानों ने साफ कहा कि कानून रद्द करने पर सरकार हां या न में जवाब दे।

6वां दौरः 8 दिसंबर
क्या हुआः भारत बंद के दिन ही गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। अगले दिन सरकार ने 22 पेज का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया।

7वां दौर: 30 दिसंबर
क्या हुआ: नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। दो मुद्दों पर मतभेद कायम, लेकिन दो पर रजामंदी बनी।

8वां दौर: 4 जनवरी
क्या हुआ: 4 घंटे चली बैठक में किसान कानून वापसी की मांग पर अड़े रहे। मीटिंग खत्म होने के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि ताली दोनों हाथों से बजती है।

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