प्रत्येक ग्राम पंचायत के एक परंपरागत जल स्त्रोत का हो जीर्णाेद्धार , संभागीय आयुक्त ने दिए निर्देश

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बीकानेर। संभागीय आयुक्त डॉ. नीरज के. पवन ने कहा कि संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक-एक परंपरागत जल स्त्रोत का चयन करते हुए इसका जीर्णाेद्धार किया जाए। संभागीय आयुक्त शनिवार को आयोजित संभाग स्तरीय वीडियो कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस वी.सी. से संभाग के ग्राम पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि और सरकारी कार्मिक जुड़े। संभागीय आयुक्त ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत एक जोहड़, तालाब या नाडी का जीर्णाेद्धार करवाए तथा इनमें मनरेगा के माध्यम से पौधारोपण करवाया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकतम बरसाती जल को संरक्षित करने के प्रयास किए जाएं।

संभागीय आयुक्त ने कहा कि संभाग के सभी जिलों में वर्षा से पूर्व पौधारोपण की तैयारी कर ली जाए। मुख्य मार्ग से जुड़ी ग्राम पंचायतों के दोनों ओर एक-एक, आईएलआर और पंचायत समिति मुख्यालयों के तीन-तीन, उपखंड मुख्यालयों के पांच-पांच, तीनों जिला मुख्यालयों के सात-सात तथा संभाग मुख्यालय की प्रमुख प्रवेश सड़कों के दस-दस किलोमीटर क्षेत्र में नीम के पौधे लगाए जाएंगे। इस कार्य में जनप्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं और आमजन का सहयोग लिया जाए।

संभागीय आयुक्त ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बेटी के जन्म पर कम से कम पांच पौधे लगाने की परंपरा शुरू हो। घर घर औषधि योजना के पौधों का प्रभावी वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत और उपखंड मुख्यालय की प्रमुख सड़क को अतिक्रमण मुक्त बनाने के निर्देश दिए। संभाग में नशा मुक्ति के लिए चल रहे मिशन अगेंस्ट नारकोटिक सबस्टेंस एब्यूज (मनसा) के तीसरे चरण की तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देशित किया। उन्होंने बताया कि यह चरण 4 जुलाई से प्रारंभ होगा। साथ ही निर्देश दिए कि पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन किया जाए। इस दौरान जिला प्रमुख मोडाराम, जिला कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नित्या के., अतिरिक्त कलेक्टर ( प्रशासन) ओमप्रकाश, अतिरिक्त कलेक्टर (नगर)  पंकज शर्मा, उप वन संरक्षक वीरेंद्र जोरा आदि मौजूद रहे।

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