बाह्य व अंतर परिग्रह का त्याग कर निग्रंथ बने-साध्वी शशि प्रभाजी म.सा.

बाह्य व अंतर परिग्रह का त्याग कर निग्रंथ बने-साध्वी शशि प्रभाजी म.सा.  बाह्य व अंतर परिग्रह का त्याग कर निग्रंथ बने-साध्वी शशि प्रभाजी म.सा. image11

बीकानेर, 21 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने बुधवार ं को बागड़ी मोहल्ले की ढढ्ढा कोटड़ी में प्रवचन में कहा कि लोक-परलोक का भय रखें तथा अपने को संभालें व देखें। बाह्य व अंतर परिग्रह का त्याग कर निग्रंथ बने।
उन्होंने कहा कि बाह्य परिग्रह धन, दौलत आदि छोड़ना सरल है लेकिन आंतरिक परिग्रह काम,क्रोध, लोभ, मान व माया आदि को छोड़ना बहुत मुश्किल है। आंतरिक परिग्रह के त्याग के लिए गहन साधना, प्रयास व प्रयत्न करना जरूरी  है। आंतरिक परिग्रह त्याग व धर्म के कार्यों में शारीरिक व मानसिक कठिनाई आने पर लक्ष्य का त्याग व परमात्मा के प्रति अविश्वास नहीं करें।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म आत्म ज्ञान के साथ मन व काया स्वस्थ रखने तथा इंद्रिय संयम का भी मार्ग बताता है। धर्म के मर्म को समझकर कषायों विशेषकर क्रोध पर नियंत्रण करें। क्रोध से शारीरिक व मानसिक क्षति होती है। आगामी 26 अगस्त से शुरू होने वाले पर्युषण पर्व के दौरान किसी तरह का क्रोध नहीं करें। अपनी आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए अपने अंतःकरण में व्याप्त मैल को साफ करें। मन को मजबूत बनाकर, अपने को शक्तिशाली समझते हुए कषायों को दूर करें।
प्रेषक-हिमांशु सेठिया प्रचार मंत्री खरतरगच्छ युवा परिषद, बीकानेर

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