राजस्थान में 10 माह बाद स्कूलों की बजेगी घंटी , अभिभावक इन बातों का रखे ख्याल

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राजस्थान में 10 माह बाद स्कूलों की बजेगी घंटी , अभिभावक इन बातों का रखे ख्याल mr bika fb post

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 10 माह से बंद स्कूलों में फिर से रौनक लौटेगी. सोमवार से 9वीं-12वीं तक के स्कूल खुल जाएंगे. अब स्कूलों का नियमित संचालन होगा, लेकिन क्लास ऑफलाइन मोड पर भी चलेंगी. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थी के स्कूल में आने के लिए अभिभावक की स्वीकृति जरूरी है. जो बच्चा स्कूल न आना चाहे, उसके लिए ऑनलाइन क्लास चलती रहेंगी.

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शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि विद्यार्थी के स्कूल आने के लिए अभिभावक की स्वीकृति जरूरी है. जो बच्चा स्कूल न आना चाहे उसके लिए ऑनलाइन क्लासेस चलती रहेंगी. हालांकि बताया जा रहा है कि 99% तक बच्चे स्कूल आने को तैयार हैं. सबने अपने सहमति पत्र स्कूल को भिजवा दिए हैं.

पहली से आठवीं तक ऑनलाइन क्लास
विभाग के निर्देशों के तहत पहली कक्षा से आठवीं तक की पढ़ाई ऑनलाइन जारी रहेगी. 9वीं से 12वीं तक का किसी भी छात्र को स्कूल आने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. अभिभावक की स्वीकृति जरूरी की गई है. वहीं डाउट क्लियर के लिए आने की छूट पहले से है. जो विद्यार्थी स्कूल नहीं आएगा उसकी पढ़ाई स्माइल प्रोजेक्ट से पहले की तरह जारी रहेगी निजी स्कूल भी ऑनलाइन कक्षा की व्यवस्था चलती रहेगी. सरकारी स्कूलों में 60% सिलेबस पहले ही कम कर दिया है, कटौती के बाद बचे हुए कोर्स का ज्यादातर हिस्सा ऑनलाइन कराया जा चुका है.
स्कूलों में ऐसी रहेगी बच्चों की बैठक व्यवस्था
अलग-अलग कक्षाओं के लिए स्कूल आने और जाने का समय अलग अलग रखा है, जिस स्कूल मैं सोशल डिस्टेंसिंग से बैठाने के पर्याप्त इंतजाम हैं, वहां 9वीं से 12वीं के बच्चों को एक ही दिन बुला सकते हैं. क्लासरूम कम हैं तो 50% बच्चे ही आएंगे. कक्षाएं 9 से 12 की ही लगेंगी. जिन स्कूलों में पर्याप्त जगह है, वहां 100% बच्चों को बुलाने की स्वीकृति सरकार ने स्कूलों को दे दी है.

अफसर करेंगे स्कूलों का दौरा
CM अशोक गेहलोत के निर्देश पर कलेक्टर और अन्य शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का विजिट करने के निर्देश दिए हैं ताकि वे कोरोना गाइडलाइन का जायजा लिया जा सके. अभिभावकों का डर खत्म हो और बच्चे मोटिवेट हो सकें.

अभिभावक ध्यान दें…

बुखार या अन्य लक्षण होने पर बच्चे को स्कूल नहीं भेजें.

प्रबंधन को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र को स्कूल खुलने की सूचना देनी होगी.

मेडिकल टीम सूचना पर स्कूल पहुंचेंगी सैनिटाइजेशन का पूरा ध्यान रखना होगा.

PTM (पेंरेट-टीचर मीटिंग) में अभिभावकों को सब कुछ समझा दिया गया है.

जिन स्कूलों में बाल वाहिनी नहीं हैं वहां पर बच्चों को स्कूल लाने ले जाने की व्यवस्था अभिभावकों के जिम्मे होगी.

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