श्रीस्वामी विमर्शानन्दगिरिजी को किया पट्टाभिषिक्त, बने आठवें महन्त

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श्रीस्वामी विमर्शानन्दगिरिजी को किया पट्टाभिषिक्त, बने आठवें महन्त mr bika fb post

बीकानेर। षोडशी भावांजलि सभा का आयोजन श्रीलालेश्वर महादेव मन्दिर, शिवमठ, शिवबाड़ी में आचार्य महा मण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती जी अध्यक्षता में एवं सीन्थल पीठाधीष्वर क्षमारामजी महाराज एवं अन्य प्रमुख संन्तों की सन्निधी में मन्दिर परिसर में गुरुदेव गद्दी पर आहुत हुई। षोडशी के अवसर पर महादेव मण्डल द्वारा श्रीलालेश्वर महादेव का एवं पण्डितों द्वारा गुरुदेव की भूसमाधि पर अभिषेक तथा षोड़शी भण्डारे में सोलह विधिवत संन्यास प्राप्त दशनाम सन्यासियों का पूजन किया गया।
भावांजलि अर्पण सांभर से पधारे योगी रमणनाथ जी ने अपनी भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि विद्ववता, सादगी, सरलता से सब के हृदय में बसते थे स्वामीजी। श्रीकृष्ण भी आज असमंजस में है कि मेरी गीता का इतनी तन्मयता से अब प्रचार कौन करेगा? बीकाणा शहर भी उदास लग रहा है, मैं स्वयं भी उदास हूँ। ऐसा मित्र फिर कहाँ मिलेगा? स्वामी जी के जीवन में तीन आदर्श रहे ये हैं साधना, स्वाध्याय और सरलता हमें भी इनको अपनाना चाहिये।
संवित् भास्करगिरिजी ने कहा कि गुरु परम्परा में भगवान वशिष्ठ का नाम आता है। वे राजगुरु भी थे। उसी राजगुरु की परम्परा में स्वामी संवित् सोमगिरिजी 27वें नक्षत्र के रूप में प्रकट हुए थे। स्वामी विमर्शानन्दगिरिजी के कन्धों पर आज बड़ी जिम्मेदारी है, उनको जो दायित्व मिला है वे उसका पूर्ण मनोयोग से निर्वहन करेंगे। स्वामी भूमानन्द सरस्वतीजी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि स्वामीजी इतनी जल्दी हमारे बीच से चले जायेंगे। लेकिन भगवान के विधान के प्रति नतमस्तक होते हुए स्वामीजी के बारे में इतना ही कहुँगा की गीता के प्रचार-प्रसार में गीता भवन ने तो प्रकाशन का कार्य किया लेकिन स्वामीजी ने बालकों में संस्कार का भाव जाग्रत करते हुए गीता का प्रचार किया। मैं शिवबाड़ी को गीताबाड़ी भी कहता हूँ। जिस प्रकार पूर्णिमा का चांद हमारे ताप को हर लेता है, गंगा मैया हमारे पाप को हर लेती है और कल्पतरू हमारे सारे मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति कर देता है उसी तरह सोमगिरिजी महाराज हमारे शशि भी हैं, गंगा भी हैं और कल्पतरू भी। गांधीविद्या मन्दिर, मानद् विष्वविद्यालय सरदारशहर के कुलाधिपति श्री कनकमल दुग्गड़ साहब ने कहा कि हमारे गुरुदेव कहीं गए नहीं हैं पहले वे बाहर थे अब वे हमारे अन्तरतम में आ गये हैं। मुझे पूरा विष्वास है कि समय समय पर वे हमारा प्रबोधन करते रहेगें।
डॉक्टर्स का आभार
गुरुदेव का इलाज करने वाले टीम डॉक्टर गुंजन सोनी व डा. करणी प्रताप सह का भी आभार प्रकट किया गया जिन्होंने स्वामीजी के शीघ्र स्वास्थ्य के लिए हर सम्भव प्रयास किया।
श्रीस्वामी विमर्शानन्दगिरिजी का पट्टाभिषेक
इससे पूर्व पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से संत समाज और गणमान्य जनों की उपस्थिति में आचार्य महा मण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती जी, संतों एवं द्वारा मुख्य पुजारी श्री श्याम पारीक व श्री रामानुज सारस्वत द्वारा विमर्शानन्दगिरिजी का अभिषेक किया गया। तिलक व माल्यार्पण कर पूजन किया गया तथा विशोकानन्द भारती जी द्वारा प्रथम चादर ओढ़ाई गई। तत्पश्चात राजपरिवार के महाराजा पुष्पेन्द्र सिंह जी के प्रतिनिधि श्री रिषभ सिंह राजवी, अध्यक्ष रातिधाटी संस्थान के नरेन्द्रसिंह बीका आदि की उपस्थित सभी सन्त-महात्माओं ने चादर ओढ़ाई तथा श्रीस्वामी विमर्शानन्दगिरिजी को महन्त पद पर पट्टाभिषिक्त किया।
तदुपरान्त संत परम्परा के अनुसार विभिन्न स्थानों से पधारे संतो द्वारा नव प्रतिष्ठित स्वामी विमर्षानन्दगिरिजी को शॉल ओेढ़ा कर पुष्टि की गई जिसमें प्रमुख संत स्वामी क्षमारामजी महाराज, पीठासीन सीन्थल मठ, योगी रमणनाथ जी सांभर, स्वामी संवित् भास्कारगिरिजी, अजमेर, स्वामी भूमानन्द सरस्वतीजी, जोधपुर, स्वामी सुबोधगिरिजी, भीनासर, स्वामी सत्यानन्दजी, कोलायत स्वामी दिनेषगिरिजी, फतहपुर स्वामी महावीर यति जी गाडोदा, स्वामी अमरानन्दजी, स्वामी अजरानन्दजी एवं स्वामी देवेन्द्रपुरीजी जोधपुर आदि शामिल रहे। केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री अर्जुनराम जी मेघवाल के प्रतिनिधि के रूप में उनके निजी सहायक श्री तेजाराम एवं श्री रवि अग्रवाल ने शॉल ओढ़ा कर अभिनन्दन किया। इस अवसर पर जोधपुर, फलौदी, भरतपुर आबू पर्वत कोलायत एवं नापासर से पधारे साधको द्वारा भी शॉल ओढ़ा कर अभिनन्दन किया गया।

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अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य महामण्डलेष्वर स्वामी विषोकानन्दजी भारती कहा कि पूज्य स्वामी संवित् सोमगिरिजी गद्दीनषीनी में भी महादेव ने मुझे निमित बनाया था तथा यह भी एक संयोग ही है कि स्वामी विमर्षानन्दगिरिजी को षिव मठ  षिवबाड़ी का अधिष्ठाता प्रतिष्ठित करने में भी महादेव ने मुझे ही निमित बनाया। मुझे पूरा विष्वास है कि ब्रह्मलीन  स्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज ने जिन लोक कल्याणकारी प्रकल्पों को प्रारंभ किया एवं उन्हें नवीन ऊॅंचाईयों पर लेकर गए उन्हें स्वामी विमर्षानन्दगिरिजी जन-जन के सहयोग से आगे बढ़ाते रहेगें।
पट्टाभिषिक्त होने के बाद अपने प्रथम उद्बोधन में विमर्शानन्दगिरिजी महाराज ने कहा कि आज भाव की नदी उमड़ रही है। हम सबने एक जीव को शिव होते हुए देखा है और शिव को जीव होते हुए देखा है। गुरुदेव के अनेक प्रवचन है, शब्द हैं जो अग्नि बीज हैं। अगर हम इन अग्नि बीजों से कुछ बीज लेकर उस पर काम करते हैं तो व्यक्ति की, परिवार की, समाज की, राष्ट्र की समस्याओं का समाधान सम्भव हो सकता है। हम सभी को मिल कर ही गुरु परम्परा को, गुरु के सपनों को, गुरुदेव की कल्पनाओं को आगे बढ़ाने के लिए निष्ठापूर्वक सद्प्रयास करने हैं।
इस कार्यकम में मानव प्रबोधन प्रन्यास के न्यासी श्री द्वारकाप्रसाद पच्चीसीया, श्री सुभाष मित्तल, श्री अविनाष मोदी, श्री जगदीष सांखला, श्री जुगल राठी, श्री महेन्द्रकुमार गुप्ता आदि द्वारा नव-प्रतिष्ठित स्वामी विमर्षानन्दगिरिजी को शॉल ओढा कर सम्मान्नित किया गया। अखिल भारतीय विष्नोई समाज के डा. अषोक धारणिया, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के श्री रमेषजी पुरोहित, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक श्री कल्याणमल शर्मा, जोधपुर से पधारे बाबा सुनील व्यास, खेरपुर भवन के प्रतिनिधि, करूणा क्लब के श्री घनष्याम जी स्वामी, षिवमठ, षिवबाड़ी के वरिष्ठ संवित् साधक श्री हरिष शर्मा, श्री बजरंगलाल शर्मा, श्री राजकुमार कौषिक, श्री रमेष जोषी श्री कन्हैयालाल पंवार, श्री कैलाषजी शर्मा, श्री भवानीषंकर व्यास, श्री हरनारायण खत्री, श्री रूपसिंहजी भाटी श्री, श्री टेकचन्द, श्री प्रतापसिंह, श्री चन्द्रषेखर शर्मा, श्री विवेक मितल, श्री अषोक कुवेरा, श्री राजीव मितल, श्री राजेन्द्रसिंह, श्री किषन आचार्य, श्री जितेन्द्र धारणिया, श्री रवि अग्रवाल, श्री अमित जांगिड़, बीजेपी के जिलाध्यक्ष श्री अखिलेष प्रताप सिंह, बीजेपी के प्रान्तिय प्रतिनिधि श्री सत्यप्रकाष आचार्य सहित अनेक साधकों ने शॉल ओढ़ाया।

 

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