केंद्र सरकार : रैपिड टेस्ट में नेगेटिव पाए गए लोग फिर से कराए जांच

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नई दिल्ली.  देशभर में कोरोना वायरस  का संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है. भारत में बीते दिन कोविड-19 के सबसे ज्यादा 95,735 नए केस सामने आने के बाद देश में संक्रमण के मामले बढ़कर 44 लाख के पार पहुंच गया है. इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि कोविड-19 के लक्षण वाले जितने भी रोगियों की रैपिड एंटीजन जांच (RAT) में उनके संक्रमण मुक्त होने की पुष्टि हुई है, उनकी आरटी-पीसीआर जांच की जाए. जिससे कि कोरोना वायरस से संक्रमित हर व्यक्ति का पता लगाया जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.

केंद्र सरकार : रैपिड टेस्ट में नेगेटिव पाए गए लोग फिर से कराए जांच prachina in article 1

स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देश
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद  और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि आरएटी में संक्रमणमुक्त पाए गए लक्षण वाले सभी मामलों और आरएटी में ही संक्रमणमुक्त पाए गए, ऐसे बिना लक्षण वाले मामले जिनमें जांच के दो या तीन दिन बाद लक्षण आने लगते हैं, उनकी आरटी-पीसीआर के जरिए फिर से जांच करवाना जरूरी है. मंत्रालय ने कहा कि इससे, जिन मामलों में संक्रमणमुक्त होने संबंधी पुष्टि गलत है, उनका समय रहते पता चलने से उन्हें आइसोलेट किया जा सकेगा. साथ ही अस्पताल में भर्ती करवाया जा सकेगा.

इन राज्यों में हालात खराब
सरकार ने ये निर्देश उस वक्त दिए हैं, जब करीब 60 फीसदी नए केस सिर्फ चार राज्यों से आ रहे हैं. बुधवार को महाराष्ट से 23577 केस सामने आए. जबकि आंध्र प्रदेश से 10418 केस रिपोर्ट किए गए. इस बीच मौत की संख्या भी बढ़ रही है. गुरुवार को देश भर में 1172 मौतें हुई. इनमें से 69 फीसदी मौत सिर्फ 5 राज्यों से रिपोर्ट की गई. ये राज्य हैं-महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली और आंध्र प्रदेश. इनमें से महाराष्ट्र से अकेले 32 फीसदी लोगों की मौत हुई.

ये है रणनीति
मंत्रालय ने ये भी कहा है कि संक्रमण के मामलों पर नजर रखने के लिए राज्यस्तरीय और जिलास्तरीय टीम या अधिकारी की तरफ से तत्काल एक निगरानी प्रणाली स्थापित की जाए. ये दल राज्यों और जिलों में नियमित तौर पर हो रही रैपिड एंटीजन जांच संबंधी जानकारियों का विश्लेषण करें. साथ ही ये सुनिश्चित करें कि लक्षण वाले मरीज जो संक्रमणमुक्त पाए गए हैं, उनकी जांच कराने में किसी भी तरह की देरी न हो.

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