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कोटा से डेढ़ गुणा ज्यादा नवजात बच्चों की बीकानेर में मौत, अस्पताल प्रबंधन ने कहा सरकार की जानकारी में

कोटा से डेढ़ गुणा ज्यादा नवजात बच्चों की बीकानेर में मौत, अस्पताल प्रबंधन ने कहा सरकार की जानकारी में  कोटा से डेढ़ गुणा ज्यादा नवजात बच्चों की बीकानेर में मौत, अस्पताल प्रबंधन ने कहा सरकार की जानकारी में bikanerdeath

बीकानेर. कोटा में 34 दिन में 106 बच्चों की मौत को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच शनिवार को बीकानेर में 30 दिन में 162 बच्चों की मौत के आंकड़े ने होश उड़ा दिए। शाम को यह जानकारी सामने आने के बाद एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एचएस कुमार के फोन की घंटियां बजने लगी। कुछ ही देर में प्राचार्य ने मौत के आंकड़े की पुष्टि कर दी। इसके बाद जिला भाजपा ने एक महीने में 162 बच्चों की उपचार के दौरान मौत की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। एसपी मेडिकल कॉलेज बीकानेर के प्राचार्य एच.एस. कुमार ने बताया कि पिछले सालों की तुलना में इस बार दिसम्बर में ज्यादा बच्चे अस्पताल आए है। सरकार की जानकारी में होने का पूछने पर उन्होंने कहा कि दिसम्बर की मासिक रिपोर्ट में मौत की सूचना जयपुर मुख्यालय भेजी हुई है। तीस दिन में 162 बच्चों की आइसीयू में मौत हुई है लेकिन इसमें किसी तरह की लापरवाही जैसा मामला नहीं है।

 

राजस्थान
कोटा: जेके लोन में 36 दिन में 110 बच्चों की जान गई
संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जेके लोन में दिसंबर से अब तक 110 नवजात की मौत हो चुकी है। अस्पताल में स्टाफ, बेड और चिकित्सा सुविधाएं नाकाफी हैं। शनिवार को कोटा पहुंचे तो अपनी ही सरकार पर बरसे। उन्होंने कहा कि इतने बच्चों की मौत गंभीर मामला है, इसके लिए जिम्मेदारी तय करनी होगी। 2019 में यहां 963 बच्चों की जान गई।

वजह: केंद्र की जांच समिति ने लापरवाही को अस्पताल में मासूमों की मौत के लिए बड़ा कारण माना है। इसके अलावा चिकित्सा संसाधनों की कमी है।

जोधपुर: सीएम के गृहनगर में सालभर में 754 बच्चों की जान गई
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर जोधपुर में बेहतर इलाज और सुविधाएं नहीं मिलने से डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज में महीनेभर में 146 बच्चे दम तोड़ चुके हैं। इसमें से 102 नवजात थे। मेडिकल कॉलेज के अधिकारी इसे सामान्य बता रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री शनिवार को बच्चों के मरने के सवाल को अनसुना कर निकल गए। जोधपुर मेडिकल कॉलेज एमडीएम और उम्मेद अस्पताल में शिशु रोग विभाग का संचालन करता है। यहां 5 जिलों- जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही और पाली से मरीज आते हैं। 2019 में शिशु रोग विभाग में कुल 47815 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें से 754 की मौत हुई।

बीकानेर: 1 महीने में 162 और साल में 1681 बच्चों की मौत
बीकानेर के पीबीएम शिशु अस्पताल में दिसंबर के 31 दिनों में 162 बच्चों की मौत हो गई यानी हर दिन पांच से ज्यादा बच्चों की मौत हो रही है। दिसंबर में यहां जन्मे और बाहर से आए 2219 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए थे। इन्हीं में से 162 यानी 7.3% बच्चों की मौत हो गई। पूरे साल की बात करें तो जनवरी से दिसंबर तक यहां कुल 1681 बच्चों की मौत हो चुकी है।

जयपुर: सरकारी अस्पताल में साल में 1630 मासूमों की जान गई

यहां के जेके लोन अस्पताल में 2019 में 56 हजार बच्चों को भर्ती किया गया। इसमें 1630 बच्चों की मौत हो गई। अस्पताल में दम तोड़ चुके वेंटीलेटर, खराब वार्मर, इंफ्यूजन पंप के साथ पर्याप्त संख्या में स्टाफ नहीं होने से नौनिहालों की मौत को रोक पाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी तरफ डॉक्टर बताते हैं कि जेके लोन जयपुर के हॉस्पिटल में प्रदेशभर से रेफर किए हुए बच्चे पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी स्थिति बेहद नाजुक होती है।

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