नगर निगम महापौर और पार्षदों के निलंबन के विरोध में शहर भाजपा ने राज्यपाल के नाम दिया ज्ञापन

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नगर निगम महापौर और पार्षदों के निलंबन के विरोध में शहर भाजपा ने राज्यपाल के नाम दिया ज्ञापन mr bika fb post

बीकानेर। राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा जयपुर ग्रेटर नगर निगम महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर और पार्षदों को राजनैतिक द्वेषता के कारण अवैधानिक और अलोकतांत्रिक रूप से निलंबित किए जाने के आदेश के विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी शहर जिला बीकानेर द्वारा प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत आज शुक्रवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदय राजस्थान के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया।

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राज्य सरकार द्वारा कानून का दुरुपयोग कर जयपुर ग्रेटर नगर निगम महापौर और अन्य पार्षदों के निलंबन के तानाशाही और अलोकतांत्रिक निर्णय के विरुद्ध यह ज्ञापन दिया गया।

ज्ञापन में राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा कानून का दुरुपयोग कर निर्वाचित महापौर श्रीमती सौम्या गुर्जर और पार्षद श्री अजय सिंह चौहान, श्री शंकर शर्मा और श्री पारस जैन के निलंबन को अविलंब रद्द करने और दोषी अधिकारियों और राज्य सरकार के विरुद्ध कानून के तहत कार्यवाही किए जाने की मांग की गई है।

शुक्रवार को शहर भाजपा की ओर से ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में भाजपा जिला उपाध्यक्ष गोकुल जोशी, डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया, जिला महामंत्री नरेश नायक, जिला मंत्री और मीडिया प्रभारी मनीष आचार्य, जिला मंत्री कौशल शर्मा, असद रजा भाटी और पार्षद जितेंद्र सिंह भाटी सम्मिलित रहे।

ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी की महापौर और बोर्ड बनने के बाद से ही राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा नगर निगम के बजट और कमेटी गठन सहित अन्य प्रशासनिक कार्यों में विभिन्न प्रकार से अड़चनें पैदा करना शुरू कर दी गई थी। राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ से ही भारतीय जनता पार्टी के बोर्ड को कानून की गलत व्याख्या कर अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है।

वर्तमान प्रकरण में भी जयपुर ग्रेटर नगर निगम क्षेत्र में बी.वी.जी. कंपनी द्वारा सफाई कार्य ठीक ढंग से संपादित नहीं किया जा रहा था और शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी, गंदगी के ढेर होने लगे और कोविड काल के दौरान गंदगी से महामारी फैलने के डर से जनता में भय व्याप्त था।

इसी शिकायत को दूर करने के लिए महापौर श्रीमती सौम्या गुर्जर ने सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था हेतु अहम बैठक बुलाई थी मगर नगर निगम आयुक्त इस बैठक को बीच में ही छोड़कर जाने लगे। महापौर द्वारा बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक को बीच में ही छोड़कर जाने से महापौर और अन्य उपस्थित पार्षदों ने आपत्ति जताई और महापौर का कथन था कि कंपनी के बिलों की जांच करवा कर ही भुगतान किया जाएगा लेकिन महापौर के निर्देश मानने से स्पष्ट इनकार करते हुए आयुक्त बीच में ही बैठक छोड़कर चले गए।

बाद में राज्य सरकार की शह और सोची समझी साजिश के तहत आयुक्त ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। राज्य सरकार के  राजनीतिक षडयंत्र के चलते जूनियर अधिकारी द्वारा इस पूरी घटना की अनुचित जांच कर रिपोर्ट सौंप दी गई। महापौर और पार्षदों को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया और मात्र 48 घंटे के भीतर ही जांच रिपोर्ट और राजनीतिक कुचक्र के आधार पर राज्य सरकार ने निलंबन की कार्यवाही कर दी।

ज्ञापन में बताया गया है कि इस मामले में महापौर को ना तो कोई बयान और ना ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया जबकि अपना पक्ष रखने हेतु महापौर द्वारा समय मांगा गया था।

नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी और अतिरिक्त आयुक्त के बयान के अनुसार भी उन्होंने किसी भी प्रकार की मारपीट होने से इनकार किया है। इससे राज्य सरकार की दुर्भावना और कानून का दुरुपयोग साफ प्रतीत होता है।

अतः महामहिम राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि अविलंब इस प्रकरण की जांच कर राज्य सरकार द्वारा पारित निलम्बन आदेश को अपास्त किया जाए और जयपुर ग्रेटर नगर निगम महापौर सहित अन्य पार्षदों का निलंबन रद्द किया जाए तथा दोषी अधिकारियों और राज्य सरकार के विरुद्ध कानून के तहत कार्यवाही की जावे।

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