सामने आने लगे कोरोना के घातक साइड इफेक्ट , देखकर हो जाएंगे हैरान

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 राजस्थान कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के कई साइड इफेक्ट नजर आने लगे हैं. 15 से 20 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद कुछ मरीज कृत्रिम ऑक्सीजन (Artificial oxygen) पर ही निर्भर हो गए हैं. इससे डॉक्टर भी चिंतित हैं. अधिकांश मरीजों को कोरोना से संबंधित सारा उपचार भी दिया जा चुका है. पर दुविधा ये है कि इनके फेफड़े कोविड न्यूमोनिया के कारण इतने ज्यादा कमजोर व खराब हो चुके हैं कि इन्हें किसी न किसी तरीके से कृत्रिम ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ रही है.

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इनमें से कुछ मास्क, कुछ एनआरएम, कुछ एनआईवी तो कुछ वेन्टिलेटर पर हैं. जैसे ही इन्हें इन कृत्रिम साधनों से हटाने का प्रयास किया जाता है. ऑक्सीजन लेवल घटने लगता है, यानी कि ये ऑक्सीजन पर ही निर्भर हो गए हैं. वर्तमान में कोविड अस्पताल में लगभग 20 से 25 मरीज आईसीयू में 15 दिनों से अधिक समय से भर्ती हैं.

 

सिकुड़ रही श्वास नलिकाएं
चिकित्सकों की माने तो जब भी शरीर में कोई भी संक्रमण होता है, चाहे वो कोविड से संबंधित हो अथवा सामान्य न्यूमोनिया, श्वास नलिकाओं से यह सूजन आती है और जब उपचार से यह सूजन ठीक होने लगती है तो सामान्य न्यूमोनिया में तो फेफड़े पूरी तरह रिकवर हो जाते है, लेकिन कोविड न्यूमोनिया में ऐसा देखने में आ रहा है कि यह सूजन ठीक होकर फाइब्रोसिस में बदल रही है. यानी कि श्वास नलिकाएं फाइब्रोसिस के कारण सिकुड़ रही हैं, जो संभवत फेफड़ों में स्थाई रूप से रह जाएगा और ऐसे मरीजों को भविष्य में फेफड़ों संबंधित व्यायाम व उपचार पर हमेशा निर्भर रहना पड़ सकता है.

 

इस केस से समझे
85 साल के बुजुर्ग बीपी व शुगर मरीज, कोविड नेगेटिव हो गए, लेकिन 15 दिनों के बाद भी मास्क  द्वारा ऑक्सीजन पर चल रहे हैं.

44 साल का व्यक्ति डायबिटिज मरीज, कोविड उपचार के बाद नेगेटिव हो गया, लेकिन 28 दिनों के बाद भी  एनआरएम द्वारा कृत्रिम ऑक्सीजन पर है.

अस्पताल में 70 वर्ष के बुजुर्ग को कोई पुरानी बीमारी नहीं, कोविड से संक्रमित होकर दो बार नेगेटिव भी हो गया, लेकिन 19 दिनों बाद भी एनआईवी वेन्टीलेंटर पर है.

75 वर्षीय महिला बुजुर्ग के कोई पुरानी बीमारी नहीं, कोविड से दोनों फेफड़े संक्रमित हुए, उपचार के बाद नेगेटिव हो गई, लेकिन 21 दिनों के बाद भी एनआईवी वेन्टीलेंटर पर है.

 

एक मरीज गैंग्रीन का शिकार
कोविड के कारण एक मरीज के पैर में गैंग्रीन भी हुआ है. कोविड मरीज में फेफड़ों का संक्रमण वेस्क्यूलर भाग को प्रभावित करता है. इससे फेफड़ों की रक्त नलिकाओं में धक्का जम जाता है. यह धक्का जब फेफड़ों की रक्त नलिकाओं से सरक कर शरीर के अन्य अंगों में पहुंच कर उन अंगों की ब्लड सप्लाई कोब्लॉक कर देता है.  इससे मरीज के पैर की नलिकाओं में धक्का जमने से ब्लड सप्लाई रूकने से पैर काला पड़ गया.

 

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