बीकानेर

वल्लभ गार्डन विकास मंच द्वारा कॉलोनी में गणगौर उत्सव आयोजित

बीकानेर। वल्लभ गॉर्डन विकास मंच द्वारा कॉलोनी में गणगौर उत्सव आयोजित किया गया। उत्सव में मनमोहक छवि, आकर्षक वेशभूषा और शृंगारित 100 से अधिक गवरजा, ईसर, भाणिया की खोळभराई के साथ-साथ लोकगीत, भजन, नृत्य, पुरस्कार तथा श्रीलालेश्वर महादेव मन्दिर, शिवमठ, शिवबाड़ी के महन्त स्वामी विमर्शानन्दगिरिजी का प्रवचन हुआ। अपने प्रवचन में स्वामी विमर्शानन्दगिरिजी ने कहा कि हमारी संस्कृति की यही विशेषता है कि सभी भेद मिटाकर, एक परिवार बनकर सामूहिक रूप से पर्व मनाते हैं। उत्स करने का भाव उत्सव, हमारी सारी सारी शारीरिक, मानसिक, भौतिक, आध्यात्मिक चेतना को ऊपर की ओर यानी ऊर्ध्वमुखी करने का भाव है उत्सव। उत्सव हमारे अन्दर सुसुप्त हुई चेतना को, सूक्ष्म शक्ति हो जगाते हैं। गणगौर का त्यौहार हमारे उत्साह के उमड़न का त्यौहार है। जब भी आनन्दित होते हैं आनन्दमूर्ति से जुड़ जाते हैं। भारतीय सनातन संस्कृति की यही दिव्यता है कि वह सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानता है। परम्पराओं और धरोहर को बचाने में मातृशक्ति की बहुत बड़ी भूमिका है। मंच के अध्यक्ष व समाजसेवी विवेक मित्तल ने कहा कि तीज, त्यौहार, लोकपर्व हमारे मन में उमंग का और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। दादी, नानी और माताएँ सनातन संस्कृति और परम्परागत ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं इसी परम्परा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सामूहिक रूप से लोक आस्था का महापर्व गणगौर उत्सव मनाया जा रहा है। श्रीमती मनीषा सिन्हा ने गणगौर पर्व की धार्मिक मान्यता और पूजन के बारे में जानकारी प्रदान की। श्रीमती अंजली मित्तल, संध्या तिवारी, माया पारीक, द्रोपदी, सरिता, कमलेश, अरूणा, सरीता, गीता, पुष्प, लीला, शशि, पार्वती, कमला, अंजली, निकिता, प्रियंका, प्रभा, गुड्डू तथा शीतल आदि ने गवरजा के मधुर लोकगीत और भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किये। आयोजन को सफल बनाने में राजूराम छींपा, रामचन्द्र मुलू, मेघराज सौलंकी, आलोक सिन्हा, राजीव मित्तल, श्यामसुन्दर शर्मा, प्रदीप, सतीश, सूरज आदि ने सहयोग दिया।

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