राजस्थान में बेटियों के लिए गहलोत सरकार ने लिए दो बड़े फैसले, हो रही तारीफ

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राजस्थान (Rajasthan) में बेटियों के लिए अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot) ने दो बड़े फैसले लिए हैं. शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार (State Government) ने पुरस्कार का दायरा बढ़ाया है. बधिर, नेत्रहीन और शारीरिक असक्षमता वाली बालिकाओं के लिए सरकार ने पुरस्कार की राशि भी बढ़ाई है.

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पुरस्कार राशि 2 हजार से बढ़ाकर 5 हजार की
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) का सपना है कि राजस्थान में कोई बालिका शिक्षा में पीछे न रहे, इसी सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकार लगातार अपने कदम आगे बढ़ा रही है. बेटियों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो अहम फैसले लिए हैं. सरकार का पहला कदम बधिर नेत्रहीन और शारीरिक असक्षमता बालिकाओं के लिए पुरस्कार की राशि बढ़ाई है. बधिर, नेत्रहीन बालिकाओं को आर्थिक संबल प्रदान वाली पुरस्कार राशि को 2 हजार से बढ़ाकर 5 हजार कर दी है. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) ने कहा कि राशि बढ़ाने से बेटियों में शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा.

 

अब 9 से 12 तक ही बालिकाओं को भी लाभ
बधिर एवं नेत्रहीन, शारीरिक अक्षमता बालिकाओं के लिए आर्थिक संबल के लिए कक्षा 1 से 8 तक की छात्राओं को 8 श्रेणियों में पुरस्कार दिया जाता था लेकिन अब कक्षा 9 से 12 की छात्राओं को भी इस योजना का लाभ मिल सकेगा. राज्य सरकार इस योजना में अब तमाम पात्र छात्राओं को 5 हजार रुपये की राशि देगी.

प्रियदर्शनी योजना का दायरा बढ़ाया
इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी योजना में व्यवसायिक शिक्षा से जुड़ी बालिकाओं को अब तक लाभ नहीं मिलता था, लेकिन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने ये ऐलान किया है कि अब व्यवसायिक शिक्षा से जुडी बालिकाओं को भी इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी योजना का लाभ मिल सकेगा.

बजट से भी बेटियों को उम्मीदें
गहलोत सरकार लगातार शिक्षा के क्षेत्र में अपने कदम आगे बढ़ा रही है, ऐसे में सरकार का ये कदम सराहनीय है. अब उम्मीद है कि आने वाले बजट से भी बेटियों को राहत मिल पाएगी.

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