डेढ़ लाख संविदाकर्मियों के लिए जल्द बड़ा फैसला ले सकती है सरकार

डेढ़ लाख संविदाकर्मियों के लिए जल्द बड़ा फैसला ले सकती है सरकार  डेढ़ लाख संविदाकर्मियों के लिए जल्द बड़ा फैसला ले सकती है सरकार

जयपुर. राजस्थान में विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मियों  को स्थाई करने के चुनावी वादे से सत्ता में आई गहलोत सरकार अब संविदा कर्मियों को स्थायी करने की ओर बढ़ रही है. ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला की अध्यक्षता में संविदा कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाई गई कैबिनेट सब कमेटी ने लगभग अपना कार्य पूरा कर लिया है. कमेटी के अध्यक्ष ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला ने  कहा कमेटी ने सचिवालय में 6 मैराथन बैठक पूरी कर ली है. अब सिर्फ एक बैठक करने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. रिपोर्ट को कैबिनेट में रखकर संविदाकर्मियों के बारे में निर्णय होगा.
अफसरों से ली गई तथ्यात्मक जानकारी
संविदाकर्मियों की समस्याओं को लेकर 16 सितंबर को सचिवालय में कमेटी की छठी बैठक हुई. बैठक में मौजूद और वेबीनार से जुड़े अफसरों से पूछा गया कि जो आंकड़े कमेटी को दिए गए हैं वे अंतिम है या इसमें भी संशोधन हो सकता है. साथ ही उनसे यह भी पूछा गया कि संविदाकर्मियों की भर्ती में आरक्षण के नियमों और अन्य मापदंडों का ध्यान रखा गया है या नहीं. अगली बैठक में इनसे जुड़ी सारी जानकारी लेकर अब कमेटी संविदाकर्मियों के आंकड़े, उनकी स्थिति, उनके संभावित समाधान और सब कमेटी के निर्णय को तय कर लेगी.
चुनावी घोषणा पत्र ने किया था वादा 
मालूम हो कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में संविदा कर्मियों को स्थाई करने का वादा किया था. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में 39 हजार 413, चिकित्सा एवं स्वस्थ्य विभाग में 11 हजार 930 चिकित्सा शिक्षा विभाग में 220, प्रारम्भिक शिक्षा विभाग में 17 हजार 336 अल्पसंख्यक मामलात विभाग में 6088, पशुपालन विभाग में 152 , सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 10 संविदा कर्मी कार्यरत हैं.  इसके अलावा कुछ विभागों में सिंगल डिजिट में संविदा पर कमर्चारी लगे हुए है. संविदा कर्मियों की माने तो प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक कर्मचारी संविदा अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं.
राहत देने की तैयारी
किसानों के कृषि कनेक्शनों की विजिलेंस जांच के बाद भरी गई वीसीआर राशि के मामले में अशोक गहलोत सरकार उनको जल्द राहत देने की तैयारी कर रही है. इसके लिए सरकार वीसीआर राशि का 70 फीसदी जमा करवाने के बाद ही समझौता समिति में जाने के प्रावधान को बदलने की तैयारी में है. समझौता समिति में जाने के लिए किसान की वीसीआर की राशि 50 फीसदी से भी कम की जा सकती है. अभी वीसीआर की 70 फीसदी राशि जमा करवाने पर ही समझौता समिति में जाया जा सकता है.
पिछले दिनों कांग्रेस प्रभारी अजय माकन के जयपुर और अजमेर संभाग के फीडबैक कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने वीसीआर का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए इस मसले में कोई ठोस कदम उठाने की मांग की थी. कांग्रेस नेताओं ने माकन को फीडबैक दिया था कि बिजली कंपनियों की वीसीआर भरने में हो रही मनमानी से किसान नाराज हैं. विजिलेंस जांच में बिजली कंपनियां किसानों पर कई बार लाखों रुपये की वीसीआर भर देती है. किसान इसकी सुनवाई के लिए देय 70 फीसदी रकम का इंतजाम नहीं कर सकता है, लिहाजा इसे कम किया जाए.

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