स्वयं का जीवन अच्छा तो दूसरों का जीवन सुधारें- आचार्य श्री महाश्रमण

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बीकानेर । पैदल विहार कर देशनोक से पलाना पहुंचे आचार्य श्री बीकानेर। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण शुक्रवार को देशनोक से विहार करते हुए साधु-साध्वियों, श्रावक-श्राविकाओं सहित पलाना पहुंचे। इस अवसर पर उनके साथ बड़ी सं2या में पुरुषों व महिलाओं ने भी पलाना तक पैदल विहार किया एवं आशीर्वाद लिया। पलाना पहुंचकर आचार्य श्री ने अपने नित्य प्रवचन में सद्भावना, सदाचार एवं सद्विचार रखने सहित नशे से दूर रहने की सीख दी। आचार्य श्री महाश्रमण ने दोपहर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं से भी संवाद कर उन्हें कार्यकर्ता कैसा हो….?, कार्यकर्ता के 1या कर्तव्य होने चाहिएं….?, कार्यकर्ता को विपरित परिस्थितियों में भी किस प्रकार रहना चाहिए ….? के बारे में उद्बोधन दिया।

आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि  स्वयं का जीवन अच्छा हो तो दूसरों का जीवन सुधारना चाहिए।  धार्मिक जगत में मानव जीवन दुर्लभ है।  आध्यात्मिक साधना के लिए मनुष्य जीवन श्रेष्ठ है। इसलिए जीवन में सदाचार और सद्विचार रखना चाहिए। व्य1ित को चाहिए कि वे सुख-सुविधाऐं मिले तो भी अतिरेक खुशी का भाव मन में नहीं आना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि कार्यकर्ताओं को हर   परिस्थिति में अपना मनोबल बनाए रखना चाहिए। कार्यकर्ताओं की परिभाषा बताते हुए कहा कि नि6न श्रेणी के कार्यकर्ता बाधाओं को देखकर काम शुरू ही नहीं करते। मध्यम श्रेणी के कार्यकर्ता काम शुरू कर देते हैं परंतु बाधा आने पर काम छोड़ देते हैं वहीं श्रेष्ठ श्रेणी के कार्यकर्ता बाधाएं आने पर नया रास्ता खोज कर सफलता प्राप्त करते हैं। आरएसएस के कार्यकर्ता बीकानेर विभाग के संघचालक टेकचन्द बरडिय़ा, कार्यवाहक संघ चालक गोमाराम जीनगर, गंगाशहर नगर संघ चालक डॉ. जतनलाल बाफना, लक्ष्मीनाथ नगर संघचालक ब्रह्मदत आचार्य,प्रान्त ग्राम विकास संयोजक निर्मल बरडिय़ा से संगोष्ठी की, श्री जैन श्वेता6बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के आयोजन प्रभारी लूनकरण छाजेड़ ने संगोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि आचार्य महाश्रमण स्वयं नागपुर विहार के समय संघ के मु2यालय गए थे तथा मोहन भागवत जी प्रतिवर्ष आचार्य श्री महाश्रमण के दर्शन लाभ के लिए आते रहते हैं,। इस अवसर पर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के अध्यक्ष अमरचन्द सोनी, मंत्री रतनलाल छल्लानी, पवन छाजेड़, पूर्व महापौर नारायण चौपड़ा साथ थे।

आचार्य श्री ने संगोष्ठी में बताया कि कार्यकर्ता वह है जो दूसरों के लिए समय, श्रम व श1ित लगाए, भले ही उसे अन्य लोगों द्वारा महत्व नहीं दिया जाए, लेकिन कठिन परिस्थितियों में भी आनन्द की अनुभूति करे वह कार्यकर्ता होता है। आचार्य श्री ने कहा कि कार्यकर्ता जो भी कार्य करे, ज्यादा से ज्यादा ईमानदारी का पालन करे, नशे से दूर रहे। उन्होंने कहा कि बुढ़ापा, बीमारी व इन्द्रिय श1ित क्षीण हो तो व्य1ित अक्षम हो जाता है, जब तक ये ना हो व्यक्ति को धर्म का कार्य करते रहना चाहिए।

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