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Pitru Paksha 2023: पितृ पक्ष में पंचबलि का महत्व, जाने विधान

Pitru Paksha 2023 : पितृ पक्ष में पंचबलि का बहुत ज्यादा महत्व है। जिस दिन भी आप अपने पितरों का श्राद्ध करतें है उस दिन आपको पंचबलि अवश्य निकालनी चाहिए। जब भी पितरों के लिए श्राद्ध वाले दिन भोजन तैयार करते हैं उस दिन ब्राह्मण देवता को खिलाने से पहले 5 हिस्से भोजन के निकाले जाते है जिसको पंचबलि के नाम से जाना जाता है।

हिंदू धर्म में हम पितृ पक्ष को एक खास और महत्वपूर्ण दिन मानते हैं, जिसे हम अपने पूर्वजों और पितृगण की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए अर्पित करते हैं। इस समय, हम श्राद्ध और अन्य धार्मिक कार्यों का आयोजन करते हैं।

इसके अलावा, 15 दिनों के अंदर हम पंचबली भोग का आयोजन भी करते हैं, जो हमारे पितृगणों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचबली भोग का आयोजन करने से मान्यता है कि हमारे पितर आत्मा को तृप्त करके हमारे वंशजों को स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

पंचबली भोग का अर्थ होता है कि हम पितृ पक्ष में पांच विशेष प्राणियों के लिए श्राद्ध का भोजन करवाते हैं, जिन्हें भूतयज्ञ भी कहा जाता है। यह श्राद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और यहाँ पर हम अपने पितृगणों के लिए विशेष भोजन प्रस्तुत करते हैं, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे तृप्त होते हैं।

जाने वे कौन से जीव हैं जिन्हें भोजन कराने से पितृ हो जाते हैं तृप्त-

विभिन्न योनियों में संव्याप्त जीव चेतना की तुष्टि हेतु भूतयज्ञ किया जाता है। अलग-अलग 5 केले के पत्तों या एक ही बड़ी पत्तल पर, पांच स्थानों पर भोज्य पदार्थ रखे जाते हैं। उरद- दाल की टिकिया तथा दही इसके लिए रखा जाता है, और इन्हें पांच भाग में रखकर- गाय, कुत्ता, कौआ, देवता एवं चींटी आदि को दिया जाता हैं। सभी का अलग अलग मंत्र बोलते हुए एक- एक भाग पर अक्षत छोड़कर पंचबली समर्पित की जाती है।

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पंचबली

1- गौ बली अर्थात- पहला भोग पवित्रता की प्रतीक गाय माता को खिलाएं।
मंत्र ॐ सौरभेयः सर्वहिताः, पवित्राः पुण्यराशयः।। प्रतिगृह्णन्तु में ग्रासं, गावस्त्रैलोक्यमातरः॥ इदं गोभ्यः इदं न मम्।।

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2- कुक्कुर बली अर्थात- दूसरा भोग कत्तर्व्यष्ठा के प्रतीक श्वान (कुत्ता) को खिलाएं।
मंत्र ॐ द्वौ श्वानौ श्यामशबलौ, वैवस्वतकुलोद्भवौ ।। ताभ्यामन्नं प्रदास्यामि, स्यातामेतावहिंसकौ ॥ इदं श्वभ्यां इदं न मम ॥

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3- काक बली अर्थात- तीसरा भोग मलीनता निवारक काक (कौआ) को खिलाएं।
मंत्र ॐ ऐन्द्रवारुणवायव्या, याम्या वै नैऋर्तास्तथा ।। वायसाः प्रतिगृह्णन्तु, भुमौ पिण्डं मयोज्झतम् ।। इदं वायसेभ्यः इदं न मम ॥

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4- देव बली अर्थात- चौथा भोग देवत्व संवधर्क शक्तियों के निमित्त- (यह भोग किसी छोटी कन्या या गाय माता को खिलाया जा सकता है)
मंत्र ॐ देवाः मनुष्याः पशवो वयांसि, सिद्धाः सयक्षोरगदैत्यसंघाः।। प्रेताः पिशाचास्तरवः समस्ता, ये चान्नमिच्छन्ति मया प्रदत्तम्॥ इदं अन्नं देवादिभ्यः इदं न मम्।।

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5- पिपीलिकादि बली अर्थात- पांचवां भोग श्रमनिष्ठा एवं सामूहिकता की प्रतीक चींटियों को खिलाएं।
मंत्र ॐ पिपीलिकाः कीटपतंगकाद्याः, बुभुक्षिताः कमर्निबन्धबद्धाः।। तेषां हि तृप्त्यथर्मिदं मयान्नं, तेभ्यो विसृष्टं सुखिनो भवन्तु॥ इदं अन्नं पिपीलिकादिभ्यः इदं न मम।।

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Pitru Paksha 2023: Panchbali has great importance in Pitru Paksha. Whenever you perform Shraddha of your ancestors, you must offer Panchabali. Whenever food is prepared for the ancestors on the day of Shraddha, before feeding it to the Brahmin deity, 5 parts of the food are taken out which is known as Panchabali.

In Hindu religion, we consider Pitru Paksha as a special and important day, which we dedicate for the peace and fulfillment of the souls of our ancestors and ancestors. At this time, we organize Shraddha and other religious functions.

Apart from this, within 15 days we also organize Panchbali Bhog, which is considered very important for our ancestors. By organizing Panchbali Bhog, it is believed that our ancestors provide affection and blessings to our descendants by satisfying their souls.

Panchabali Bhog means that we offer Shraddha food for five special beings in Pitru Paksha, which is also called Bhootayagya. This is an important part of Shraddha and here we offer special food to our ancestors, which brings peace to their souls and makes them satisfied.

Know which are those creatures whose ancestors become satisfied by feeding them –

Bhoota Yagya is performed to appease the living beings present in different species. Food items are kept at five places on 5 separate banana leaves or on the same big plate. Urad-dal cakes and curd are kept for this, and these are divided into five parts and given to cow, dog, crow, god and ant etc. Chanting different mantras, Panchabali is offered to each person, leaving each part intact.

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