INDIA-US युद्धाभ्यास संपन्न: बीकानेर के महाजन क्षेत्र में हो रहा युद्ध अभ्यास संपन्न

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INDIA-US युद्धाभ्यास संपन्न: बीकानेर के महाजन क्षेत्र में हो रहा युद्ध अभ्यास संपन्न mr bika fb post

बीकानेर के महाजन फिल्ड फायरिंग रेंज में आठ फरवरी से शुरू हुआ भारत और अमेरिका का संयुक्त युद्धाभ्यास रविवार को सशस्त्र परेड के साथ संपन्न हो गई। इन पंद्रह दिनों में दोनों देशों ने काउंटर टेरेरिज्म के खिलाफ एक साथ लड़ने की तैयारी की। भविष्य में भारत या अमेरिका की जमीन पर दोनों देशों की ब्रिगेड को साथ लड़ना पड़ा तो एक दूसरे के हथियारों को उपयोग में लाने में दिक्कत नहीं होगी। रेंज के कार्यक्रम स्थल पर दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने एक दूसरे का आभार जताया और भविष्य में इस तरह के युद्धाभ्यासों के लिए अपने जवानों को प्रेरित करने का संकल्प लिया।

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युद्धाभ्यास में क्या -क्या सीखा दोनों देशों की सेनाओं ने 

1. हथियारों की तकनीक

दोनों देशों ने अपने अपने हथियार एक्सचेंज किए। भारत के जवानों ने अमेरिकी टैंक स्ट्राइकर को साधने का प्रयास किया तो अमेरिकी जवानों ने BMP 2 के साथ बमबारी करने का अभ्यास किया। भविष्य में कोई जॉइंट एक्शन होगा तो यह लाभदायी साबित होगा।

2. प्लानिंग की कुशाग्रता

दोनों देशों ने समझा कि किसी भी युद्धस्थल पर उतरने से पहले प्लानिंग कैसे की जा सकती है। इस प्लानिंग में किन किन बातों को खास ध्यान रखना होता है। जब टैंक मोर्चा संभाले हुए हैं तो बैक में हेलीकाप्टर कैसे काम करेंगे, जब जवान आगे बढ़ रहे हैं तो ड्रोन सहित अन्य संसाधनों का उपयोग कैसे होगा?

3. तकनीकी सहयोग बढ़ा

भारत और अमेरिका के पास अपनी अपनी तकनीक है। अमेरिका के पास भारत से ज्यादा एडवांस हथियार है तो हमारे पास पुराने होने के बावजूद कारगर व मजबूत हथियार है। इन दोनों की तकनीक को समझने का मौका मिला।

4. अमेरिकी हथियार चलाने का अवसर

भारतीय जवान अपने हथियारों के साथ दुश्मन को खत्म करने का दमखम रखते हैं लेकिन अमेरिकी हथियारों की समझ इस अभ्यास के दौरान बनी। भारतीय जवानों को अमेरिका के एम 5.56, 60 एमएम मोर्टार, 7.62 मशीन गन, दुनिया का सबसे छोटा ब्लैक हॉर्नेट ड्रोन और रावेन के बारे में समझने का मौका मिला।

5. आतंकी ठिकानों पर अब पैना होगा हमला

दोनों देश आतंक से प्रभावित हैं और दोनों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए एक-दूसरे को समझने का प्रयास किया है। खासकर पाकिस्तान से होने वाली आतंकी घुसपैठ को रोकने में यह अभ्यास काफी लाभदायी साबित हो सकता है। जिस तरह ट्रेस पासिंग, एरिया सर्च और बेकअप के साथ फायरिंग का अभ्यास किया गया है, यह सर्जिकल स्ट्राइक जैसा ही था।

6. पाकिस्तान को संदेश

आतंकवाद के खिलाफ भारत का यह युद्धाभ्यास एक तरह से पाकिस्तान को चेतावनी भी है। पाकिस्तान से महज सौ किलोमीटर की एयर डिस्टेंस पर हुए इस युद्धाभ्यास में अमेरिका ने अपने 18 ग्राम के ड्रोन से लेकर स्ट्राइकर टैंक सहित कई हथियारों से अपनी शक्ति दिखाई। यह भी जताया कि भारत के साथ कार्रवाई में वो कितना सहज है।

7. इंटेलिजेंस पर भी रहा फोकस

इस दौरान अमेरिकी सेना अपने साथ दो गैर सैन्य कार्यकर्ताओं को लेकर भी आई। यह लोग अमेरिकी सेना में काम नहीं करते लेकिन US आर्मी के लिए इंटेलिजेंस का काम करते हैं। माइक्रो लेवल पर होने वाले इस काम पर भारतीय जवानों व अधिकारियों के साथ इन विशेषज्ञों ने हर वक्त अपना इनपुट दिया।

8. जवान स्तर पर संपर्क

भारत और अमेरिका के बीच कई तरह की मीटिंग्स और अभ्यास होते हैं लेकिन जवानों को आपस में मिलने का अवसर इस तरह के युद्धाभ्यास में ही मिलता है। इस युद्धाभ्यास में अमेरिकी और भारतीय जवान बहुत सहज नजर आये। दाेनों एक दूसरे से हंसी मजाक करने के साथ ही हथियारों पर गंभीर चिंतन करते नजर आये।

9. मौसम के अनुकूल हुए

अमेरिकी सेना ने भारत के रेतीले धोरों में काम करने का अनुभव लिया। इस तरह की जगह अमेरिका में नहीं है लेकिन एशिया के कई देशों में इस तरह के रेतीले धोरे हैं। अमेरिकी सैनिकों को अब धोरों की विषम परिस्थितियों में काम करने का अवसर मिल गया।

10. सामाजिक आदान प्रदान

इस अभ्यास का युद्ध से हटकर एक लाभ सामाजिक आदान प्रदान भी रहा। जहां दोनों देशों के जवानों ने एक दूसरे का समझने का प्रयास किया। अमेरिकी जवानों काे बताया गया कि भारत किस तरह परम्पराओं का निर्वाह करता है। बसंत पंचमी पर अमेरिकी जवानों व अधिकारियों ने मां सरस्वती का पूजन किया।

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