बेहद शुभ है Mahashivratri का संयोग, ऐसे करें पूजन ,इन बातों का रखें विशेष ध्यान

बेहद शुभ है Mahashivratri का संयोग, ऐसे करें पूजन ,इन बातों का रखें विशेष ध्यान  बेहद शुभ है Mahashivratri का संयोग, ऐसे करें पूजन ,इन बातों का रखें विशेष ध्यान MAHJASHIVRATRI

बेहद शुभ है Mahashivratri का संयोग, ऐसे करें पूजन ,इन बातों का रखें विशेष ध्यान mr bika fb post

आज पूरे देश में महाशिवरात्रि (Mahashivaratri) का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. पूरे देश भर के शिवालयों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है. माहौल भक्तिमय हो चुका है.

बेहद शुभ है Mahashivratri का संयोग, ऐसे करें पूजन ,इन बातों का रखें विशेष ध्यान prachina in article 1

हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का त्योहार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जो इस साल 11 मार्च गुरुवार को है. महाशिवरात्रि के त्योहार पर इस बार दशकों बाद कई विशेष संयोग बन रहे हैं, जिससे त्योहार का महत्व और अधिक बढ़ गया है.

पहला संयोग ये है कि महाशिवरात्रि के दिन मकर राशि में एक साथ 4 बड़े ग्रह- शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा मौजूद रहेंगे. दूसरा संयोग ये है कि आज महाशिवरात्रि के दिन शिवयोग, सिद्धियोग और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है. इस दुर्लभ योग में भगवान शिव की आराधना करने पर सभी तरह के दोष भी दूर होंगे और कष्टों से भी मुक्ति मिलेगी. साथ ही इस दिन रुद्राभिषेक करना भी शुभदायक होगा.

पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा और व्रत रखने के दौरान किन नियमों का पालन करना है-

महाशिवरात्रि तिथि- 11 मार्च 2021, गुरुवार
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ- 11 मार्च 2021 को दोपहर 2.39 बजे से
चतुर्दशी तिथि समाप्त-  12 मार्च 2021 को दोपहर 3.02 बजे

पूजा का सबसे शुभ समय- निशिता काल रात में 12:06 से 12:54 बजे तक 48 मिनट का समय
महाशिवरात्रि पारण समय- 12 मार्च की सुबह 6.34 बजे से दोपहर में 3.02 तक

पहर के मुताबिक पूजन का समय
प्रथम प्रहर की पूजा का समय – 11 मार्च को शाम में 06:27 से रात में 09:28 बजे तक
दूसरे पहर की पूजा का समय – 11 मार्च को रात में 09:28 से बीच रात 12.30 तक
तीसरे पहर की पूजा का समय – 12 मार्च को रात 12:30 से रात 03:32 बजे तक
चौथे पहर की पूजा का समय – 12 मार्च को रात 03:32 से सुबह 06:34 बजे तक

क्यों मनाई जाती है महशिवरात्रि
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन को शिव और शक्ति के मिलन के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है. इस दिन भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की भी पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का व्रत रखने वालों को सौभाग्य, समृद्धि और संतान की प्राप्ति होती है. यह व्रत बेहद कल्याणकारी है और इससे अश्वमेध यज्ञ तुल्य फल प्राप्त होता है. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने ही धरती पर सबसे पहले जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया था, इसीलिए भगवान शिव को आदिदेव भी कहा जाता है.

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
-सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके भोलेनाथ का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें.
-फिर शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें, उन्हें बेलपत्र, धतूरा, फूल और अक्षत आदि अर्पित करें.
-इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर कभी भी कदंब, केवड़ा या केतकी के फूल न चढ़ाएं.
-शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त ध्यान रहे कि उसके तीनों पत्ते हों और वह कहीं से भी कटे या टूटे न हों और बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग से स्पर्श करना चाहिए.
-शिवलिंग पर जो चावल चढ़ाएं, वे साबुत हों, ध्यान रहे कि टूटे चावल न चढ़ाएं.
-बेलपत्र चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर जल भी जरूर अर्पित करें.
-शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित न करें और शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम या रोली न चढ़ाएं. शिवलिंग पर सिर्फ चंदन चढ़ाएं.
-शिव पुराण का पाठ करें और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करें.
महाशिवरात्रि का उपवास रख रहे हों तो पूरे दिन फलाहार ही करें और अनाज या नमक का सेवन न करें.
-अगर सेहत से जुड़े कारणों की वजह से नमक खाना जरूरी है तो व्रत में इस्तेमाल होने वाले सेंधा नमक का ही सेवन करें.
-शिवजी को सफेद रंग के मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए और खट्टे फलों का भोग लगाने से बचना चाहिए.
-व्रत करने वाले व्यक्ति को इस दिन सोना नहीं चाहिए. महाशिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण करने का विशेष महत्व है.

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