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भारत चीन की इस सीमा पर जवानों की रक्षा करती है करणी माता

भारत-चीन सीमा पर नाथुला दर्रे की बॉर्डर पोस्ट पर तैनात जवानों की यहां बने करणी माता मंदिर में अटूट आस्था और विश्वास है। यहां ड्यूटी करने वाले जवान मानते हैं कि करणी माता सीमा पर मुस्तैद जवानों की रक्षा करती है। 1968 में बीकानेर के एक जवान ने यहां पर मंदिर की स्थापना की थी। समुद्र तल से 14 हजार 140 फुट की ऊंचाई पर नाथुला दर्रे की पहाड़ी वैसे तो सूखी और वीरान है लेकिन गंगटोक से यहां के रास्ते में चार झीलें भी मौजूद हैं।

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सैन्य अफसर बताते हैं कि 1968 में बीकानेर (राजस्थान) का एक जवान की नाथुला दर्रे पर तैनाती हुई थी। वह माता करणी देवी का भक्त था। उस जवान का मानना था कि यहां पर कई कठिन परिस्थितियों में माता ने उसकी रक्षा की है। जिसकी बाद उन लोगों ने यहां माता करणी देवी का मंदिर बना दिया गया। यहां पर ड्यूटी करने वाले ज्यादातर जवानों की इस मंदिर में काफी श्रद्धा है।

करणी माता का मन्दिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर है जो राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है। इसमें देवी करणी माता की मूर्ति स्थापित है। यह बीकानेर से ३० किलोमीटर दक्षिण दिशा में देशनोक में स्थित है। करणी माता का जन्म चारण कुल में हुआ यह मन्दिर चूहों का मन्दिर भी कहलाया जाता है। मन्दिर मुख्यतः सफेद चूहों के लिए प्रसिद्ध है। इस पवित्र मन्दिर में लगभग 25000 चूहे रहते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर संगमरमर पर नक्काशी को भी विशेष रूप से देखने के लिए लोग यहां आते हैं। चांदी के किवाड़, सोने के छत्र और चूहों (काबा) के प्रसाद के लिए यहां रखी चांदी की बड़ी परात भी देखने लायक है।

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श्रद्धालुओं का मत है कि करणी देवी साक्षात मां जगदम्बा की अवतार थीं। अब से लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पूर्व जिस स्थान पर यह भव्य मंदिर है, वहां एक गुफा में रहकर मां अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना किया करती थीं। यह गुफा आज भी मंदिर परिसर में स्थित है। मां के ज्योर्तिलीन होने पर उनकी इच्छानुसार उनकी मूर्ति की इस गुफा में स्थापना की गई। बताते हैं कि मां करणी के आशीर्वाद से ही बीकानेर और जोधपुर राज्य की स्थापना हुई थी।

Karni Matha Temple

संगमरमर से बने मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। मुख्य दरवाजा पार कर मंदिर के अंदर पहुंचते ही चूहों की धमाचौकड़ी देख मन दंग रह जाता है। चूहों की बहुतायत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पैदल चलने के लिए अपना अगला कदम उठाकर नहीं, बल्कि जमीन पर घसीटते हुए आगे रखना होता है। लोग इसी तरह कदमों को घसीटते हुए करणी मां की मूर्ति के सामने पहुंचते हैं।

चूहे पूरे मंदिर प्रांगण में मौजूद रहते हैं। वे श्रद्धालुओं के शरीर पर कूद-फांद करते हैं, लेकिन किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते।  इन चूहों की उपस्थिति की वजह से ही श्री करणी देवी का यह मंदिर चूहों वाले मंदिर के नाम से भी विख्यात है। ऐसी मान्यता है कि किसी श्रद्धालु को यदि यहां सफेद चूहे के दर्शन होते हैं, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। सुबह पांच बजे मंगला आरती और सायं सात बजे आरती के समय चूहों का जुलूस तो देखने लायक होता है।

 

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