विलुप्त हो रही राजस्थानी वेशभूषा, भाषा को लेकर प्रधानमंत्री को भेजा पत्र , सहयोग की अपेक्षा

विलुप्त हो रही राजस्थानी वेशभूषा, भाषा को लेकर प्रधानमंत्री को भेजा पत्र , सहयोग की अपेक्षा  विलुप्त हो रही राजस्थानी वेशभूषा, भाषा को लेकर प्रधानमंत्री को भेजा पत्र , सहयोग की अपेक्षा pawan vyas lekh

बीकानेर । बीकानेर के साफा विशेषज्ञ पवन व्यास का कहना हैं की वर्तमान में विलुप्त हो रही राजस्थानी वेशभूषा, भाषा, आभूषण और साफा कला एक बेहद चिन्त्य विषय हैं, व्यास के अनुसार इस कला में सरकार के द्वारा भी सहयोग की अपेक्षा हैं।

विलुप्त हो रही राजस्थानी वेशभूषा, भाषा को लेकर प्रधानमंत्री को भेजा पत्र , सहयोग की अपेक्षा prachina in article 1

बीकानेर के १९ वर्षीय पवन ने आज भारत के प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति, राजस्थान के मुख्यमंत्री सहित मंत्रियो को ईमेल भेज अवगत करवाया हैं.
पवन व्यास द्वारा जारी ईमेल निम्न हैं –

उक्त ईमेल का हिन्दी अनुवाद :-

वर्तमान में राजस्थान की साफा कला कहीं ना कहीं बिखरती नजर आ रही है जो राजस्थान पाग – पगड़ियों के लिए विख्यात था, वो आज पगड़ी के क्षेत्र में पीछे जाते दिखाई दे रही है ।पहले राजस्थान में सब लोग पगड़ी पहनते थे वही आज के समय मे लोगो में इनका प्रचलन कम होता जारहा है । पगड़ी का प्रचलन कम होना राजस्थान की संस्कृति के लिए भविष्य में इस कला के लिए खतरा है कहीं ये कला खत्म न हो जाये ।

इस हेतु हम सरकार से ये निवेदन करते है कि –

1 . राजस्थान में ही नही बल्कि भारत के हर हिस्से में हो राजस्थान की पगड़ियों का संग्रहालय हो ताकि लोग इस कला से परिचित हो सके ।
2. पाठ्यक्रम में हो राजस्थानी कला संस्कृति के पहनावे का वर्णन । पगड़ियों के साथ दिया जाना चाहिए राजस्थानी आभूषणो पर विशेष ध्यान ।
3. नई शिक्षा नीति में कला के तौर साफा कला को शामिल किया जाना चाहिए | सप्ताह में एक दिन राजस्थानी स्कूलों में लगाई जानी चाहिए साफा बांधने की कला की कक्षा ।

4. आत्मनिर्भर भारत के तहत देश की युवा पीढ़ी को इस कला से परिचित करवाकर रोजगार के अवसर पैदा किये जा सकते है ।

ऐसा करने से राजस्थान की इस कला को बढ़ावा मिलेगा और विश्व के हर कोने तक हमारी इस संस्कृति का प्रचार होगा ।

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