सात साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़ी रसोई गैस की कीमतें, जानिए वजह

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सात साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़ी रसोई गैस की कीमतें, जानिए वजह mr bika fb post

क्या आपको पता है कि पिछले छह साल में गाड़ी चलाने से ज्यादा किचन में खाना बनाना महंगा हुआ है. तेल कंपनियों (Oil Companies) ने दिसंबर माह यानि की पिछले माह एलपीजी (LPG) के दाम 100 रूपए बढ़ोतरी का बोझ पूरी तरह से ग्राहकों पर डाल दिया है. बढ़ोतरी के बाद इस 14.2 किग्रा के रसोई गैस सिलेंडर (Gas cylinder) के दाम 698 रुपए हो गए हैं. यह सारी कीमत आपको अपनी जेब से देनी पड़ेगी.सात साल में पेट्रोल 20 फीसदी महंगा हुआ है. जबकि रसोई गैस 66 फीसदी महंगी हो चुकी है. यानी पेट्रोल (Petrol) से तीन गुणा से ज्यादा एलपीजी के दाम बढ़े हैं.

सात साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़ी रसोई गैस की कीमतें, जानिए वजह prachina in article 1

पिछले सात साल में रसोई गैस के दाम इस रफ्तार से बढे की पेट्रोल और डीजल को पीछे छोड दिया. जबकि देश में हाहाकर पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को लेकर हो रहा है. आपको सुनकर आश्चर्य होगा की पेट्रोल और डीजल से ज्यादा रसोई गैस के दामों में साल सालों में 66 फीसदी तक बढोतरी की गई है. जबकि सात साल में पेट्रोल के दामों में 20 फीसदी और डीजल के दामों में 43 फीसदी की बढोतरी हुई हैं. तेल कंपनियों ने दिसंबर माह में दो बार रसोई गैस के दामों में 100 रूपए की बढोतरी की. जिससे एलपीजी के दाम 698 रूपए पहुंच गए. राजस्थान की बात करें तो गैस के दाम बढ़ाने के बाद अब सरकार हर माह राजस्थान से ही लगभग 183.56 करोड़ रुपए की एक्सट्रा इनकम करेगी. क्योंकि कोरोनाकाल में मई से गैस सब्सिडी आनी बंद हो गई जिसके बाद से आज दिन तक गैस की कीमतों में लगभग 115 रुपए का अंतर आ गया हैं.

प्रदेश में वर्तमान में तीनों कंपनियों (IOCL, HPCL और BPCL) के 1.66 करोड़  से ज्यादा उपभोक्ता है. इनमें से लगभग 6.38 लाख लोग केन्द्र सरकार से मिलने वाली सब्सिडी को छोड़ चुके हैं.इस हिसाब से पूरे प्रदेश में अब रसोई गैस पर सब्सिडी लेने वाली की संख्या लगभग 1.59 करोड़ हैं.मई से अब तक के रेटों की तुलना करके देंखे तो 115 रुपए के अंतर के हिसाब से हर माह कुल 183.59 करोड़ रुपए की सब्सिडी सरकार के पास हर माह बचेगी और ये भार आमजनता पर पडेगा.दरअसल घरेलू गैस पर अप्रैल तक करीब 147 रुपए की सब्सिडी उपभोक्ताओं के बैंक खातों में आती थी, लेकिन मई में जब कीमतों में 148 रुपए की कमी हुई, तब से सब्सिडी बंद हो गई. मई से दिसंबर तक कीमतों में आए बदलाव को देखें तो 115 रुपए का अंतर आ चुका हैं. मई में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 583 रुपए थे, जो अब बढ़कर 698 रुपए पर पहुंच गए हैं.

प्रोडक्ट———10 जनवरी (2021).1 अप्रैल 2014.अंतर (रु./%)
एलपीजी————-698—– ———-420————-278 (66 %)
पेट्रोल—————91.62————– 75.78———- 15.84 (20.9%)
डीजल————–83.64—————- 58.14———- 25.5 (43%)

 

4 बड़े कारण; जिन्होंने सिलेंडर में महंगाई की गैस भर दी
1. उज्ज्वला योजना
सरकार ने लॉकडाउन के दौरान जो उज्जवला योजना के लिए जो निशुल्क सिलेंडर दिए हैं. उनकी भरपाई भी तेल कंपनियां करने में लगी हैं. राजस्थान में इस योजना के तहत करीब 63 लाख उपभोक्ता हैं.
2. तीन तरह के टैक्स
सरकार के 3 तरह के टैक्स हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल व एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं. केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर 103% एक्साइज ड्यूटी लगाई. राज्य ने प्रति ली. 38% वैट लगा रखा है. 1.50 रु. ली. रोड सेस.
3. सर्दियों में मांग बढ़ना
सर्दियों में यूरोपियन व रशियन देशों में एलपीजी की डिमांड बढ़ जाती है. क्योंकि यहां घर गर्म रखने के लिए हीटर आदि संसाधन उपयोग होते हैं. इनमें एलपीजी अधिक उपयोग होती है क्योंकि यह सस्ती पड़ती है.
4. ट्रांसपोर्टेशन महंगा
पेट्रोलियम वाहनों का ट्रांसपोर्टेशन महंगा है. रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सुरक्षित पहुंचाने के लिए बेहतर संसाधनों का अभाव है. इसमें करीब 26.56 रुपए प्रति लीटर का खर्च आता है.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बाजार के भरोसे छोड़ते वक्त सरकार ने वादा किया था कि कच्चे तेल की कम और ज्यादा होती कीमतों का सीधा फायदा देश की आम जनता को मिलेगा, लेकिन इतने सालों बाद हुआ सिर्फ उलटा.पिछले सालों में जिस तेजी के साथ कच्चे तेल के भाव घटे हैं, उतनी ही तेजी के साथ केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स पेट्रोल और डीजल पर बढ़ा है. यही वजह है कि 22.71 रुपए का कच्चा तेल देश में 91 रुपए के भाव से पेट्रोल और 83 रुपए प्रति लीटर से डीजल में मिल रहा है. देश में सबसे ज्यादा टैक्स राजस्थान सरकार वसूलती है.यहां 38 फीसदी टैक्स पेट्रोल व 28 फीसदी डीजल पर लगता है. मणिपुर दूसरे, तेलंगाना तीसरे व कर्नाटक चौथे स्थान और पांचवें स्थान पर मध्य प्रदेश है. भोपाल में सबसे महंगा पेट्रोल बिक रहा है.

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