मोदी ने कहा- नवंबर तक 80 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो गेहूं या चावल और 1 किलो चना मुफ्त दिया जाएगा

मोदी ने कहा-  नवंबर तक 80 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो गेहूं या चावल और 1 किलो चना मुफ्त दिया जाएगा  मोदी ने कहा-  नवंबर तक 80 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो गेहूं या चावल और 1 किलो चना मुफ्त दिया जाएगा 2020 06 30 1593513442

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया से तुलना करें तो भारत कोरोना के मामले में संभली हुई स्थिति में है, लेकिन अनलॉक में लापरवाही बढ़ती जा रही है। लोगों को लॉकडाउन की तरह ही सतर्कता दिखाने की जरूरत है। जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं हमें उन्हें टोकना होगा, रोकना होगा और समझाना भी होगा। यह प्रधानमंत्री का छठवां राष्ट्र के नाम संबोधन होगा, जो वह कोरोना के दौर में देंगे। प्रधानमंत्री मोदी के कोरोना के दौर में अब तक के संबोधन 

प्रधान हो या प्रधानमंत्री कोई भी नियमों से ऊपर नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी आपने खबरों में देखा होगा कि एक देश के प्रधानमंत्री पर 13 हजार का जुर्माना इसलिए लग गया, क्योंकि वे मास्क पहने बिना गए थे। भारत में भी स्थानीय प्रशासन को इसी चुस्ती से काम करना चाहिए। यह 130 भारतीयों की रक्षा का अभियान है। गांव का प्रधान हो या देश का प्रधानमंत्री, कोई भी नियमों से ऊपर नहीं है।

तीन महीनों में 20 करोड़ जन-धन खातों में 31 हजार करोड़ रुपए जमा
लाॅकडाउन में यही कोशिश रही कि ऐसी स्थिति ना आए कि गरीबों के घर में चूल्हा ना जले। हर किसी ने प्रयास किया कि इतने बड़े देश में गरीब भाई-बहन भूखा ना सोए। देश हो या व्यक्ति, समय और संवेदनशीलता से फैसले लेने से किसी भी मुसीबत का सामना करने की शक्ति अनेक गुना बढ़ जाती है। लाॅकडाउन होते ही सरकार गरीब कल्याण योजना लेकर आई। इसके तहत पौने दो लाख करोड़ का पैकेज दिया गया। 3 महीनों में 20 करोड़ जन-धन खातों में 31 हजार करोड़ रुपए जमा करवाए गए हैं। 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं। इसके साथ ही गांवों में श्रमिकों को रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान तेज गति से आरंभ कर दिया गया है।  

कंटेनमेंट जोन में बहुत ध्यान देना होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही हम दो गज दूरी को लेकर, बीस सेकंड हाथ धोने को लेकर सतर्क रहे हैं। आज जब हमें ज्यादा सतर्कता की जरूरत है तो लापरवाही बढ़ना बहुत ही चिंता का कारण है। लाॅकडाउन के दौरान गंभीरता से नियमों का पालन किया गया था। अब सरकारों को स्थानीय निकाय की संस्थाओं को, देश के नागरिकों को फिर से उसी तरह की सतर्कता दिखाने की जरूरत है। विशेषकर कंटेनमेंट जोन पर बहुत ध्यान देना होगा। जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें रोकना-टोकना और समझाना होगा।

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