नगर निगम की बजट बैठक आज,मेयर पेश करेंगी शहर के विकास के लिए बजट

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मेयर सुशीला कंवर राजपुरोहित सोमवार को शहर के विकास के लिए 377 करोड़ 54 लाख का बजट पेश करेंगी। बैठक दोपहर 12 बजे रविंद्र रंगमंच पर शुरू होगी। कोरोना के कारण 2020 में साधारण सभा की एक ही बैठक हो पाई।

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एक साल बाद हो रही बजट बैठक को लेकर कांग्रेसी पार्षदों ने जनहित के मुद्दों को लेकर मेयर को घेरने की तैयारी की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि बजट पास कराया जाएगा।

2021-22 के बजट में निगम कर्मचारियों के विभिन्न मदों में वेतन भत्तों का खर्च 124 करोड़ 84 लाख 13 लाख रुपए तथा विकास कार्यों पर 127 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि बजट में आय बढ़ाने के केवल आंकड़ें पेश किए हैं। नगरीय विकास कर के सौ करोड़ बकाया हैं। यह निगम की बड़ी आय का जरिया है।

इसकी वसूली के टारगेट हर साल बजट में रखे जाते हैं, लेकिन पूरे नहीं हो पाते। वर्ष 2019-20 में दस करोड़ के लक्ष्य के विपरीत चार करोड़ 21 लाख की ही वसूली हो सकी। उसे देखते हुए वर्ष 2020-21 में पांच करोड़ का ही टारगेट रखा गया, लेकिन अब तक निगम 2 करोड़ का टैक्स ही वसूल पाया है। हालांकि 31 मार्च तक टारगेट पूरा होने की उम्मीद लगाई जा रही है। नए बजट में यूडी टैक्स का टारगेट 10 करोड़ तय किया है।

सख्ती से वसूला जाए यूटी टैक्स
निगम के पूर्व आयुक्त मौला बक्श का कहना है कि जब तक नगरीय विकास कर नहीं चुकाने को अपराध नहीं माना जाएगा, आय नहीं बढ़ेगी। क्योंकि आय का यह एक मात्र सोर्स है। अन्य वसूलियों में टारगेट पूरे नहीं करने पर राजस्व निरीक्षक और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। सख्ती होने पर ही निगम की आय बढ़ सकती है।

इन 7 बिंदुओं से समझें…बजट में आय बढ़ाने के ये सिर्फ आंकड़े हैं

1. साइनेज और विज्ञापन बोर्ड से 2019-20 में चार करोड़ की आय का लक्ष्य था। लेकिन निगम ने डेढ़ करोड़ ही कमाए। वर्ष 2020-21 में एक करोड़ 30 लाख का लक्ष्य रखा था। 50 लाख का आंकड़ा भी निगम नहीं छू पाया है। नए बजट में लक्ष्य डेढ़ करोड़ रखा गया है।
2. वर्ष 2.19-20 में पेयजल कनेक्शन के लिए रोड कटिंग से एक करोड़ 20 लाख की आय के लक्ष्य के विपरीत निगम नौ लाख ही कमा पाया। इस बार 15 लाख का ही लक्ष्य रखा है।
3. मोबाइल टावर लगाने की अनुमति से निगम को 2019-20 में दो करोड़ से अधिक आय हुई थी। उसे देखते हुए 2020-21 में तीन करोड़ का लक्ष्य रखा गया, लेकिन 41 लाख की भी आय नहीं हुई। इस बार फिर तीन करोड़ का लक्ष्य रखा है।
4. समझौता और जुर्माने से इस बार 2 करोड़ 50 लाख की आय का लक्ष्य रखा गया है। जबकि पिछले साल भी इतना ही लक्ष्य था, लेकिन वसूली दस लाख रुपए की भी नहीं हुई। वर्ष 2019-20 में डेढ़ करोड़ की वसूली के लक्ष्य के विपरीत मात्र पांच लाख ही वसूली हो सकी।
5. विद्युत उपकर का दो साल में एक भी पैसा निगम को नहीं मिला, लेकिन बजट में हर बार दो करोड़ का लक्ष्य रखा जाता है।
6. जमीन बेच कर दस करोड़ रुपए कमाने का लक्ष्य तीसरी बार रखा गया है, लेकिन निगम दस लाख भी नहीं कमा पा रहा।
7. बजट में यूआईटी से आय का लक्ष्य सात करोड़ तय किया है। जबकि पिछले दो बजट में पांच करोड़ का लक्ष्य था। लेकिन निगम को यूआईटी से एक पैसा नहीं मिला।

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