राजस्थान की सड़कों पर दौड़ेगी नई टेक्नोलॉजी की बसें, जानिए खासियत

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राजस्थान रोडवेज सीएमडी की माने तो राजस्थान रोडवेज की प्रतिदिन प्रदेश में प्रतिदिन दो बसें कंडम होती है तो प्रतिवर्ष 700 बसें कंडम होती है. कंडम बसों के संचालन से रोडवेज की यात्रा सुगम और सुविधाजनक नहीं होगी.पुरा ने वाहन होने से ईधन की खपत ज्यादा होती है,मेंटिनेशन भी ज्यादा लगता है और किलोमीटर भी ज्यादा आता है. ऐसे में रोडवेज को बहुत घाटे का सामना करना पडता है, जिससे कर्मचारियों को भी समय पर वेतन नहीं मिलना, अन्य लाभ भी नहीं मिलते हैं. ऐसे में नए उत्सर्जन मानक बीएस-6 की बसें रोडवेज में शामिल करेंगे तो रोडवेज विभाग को भी खर्चा भी कम होगा. इसके लिए रोडवेज बोर्ड में बीएस-6 की 550 बसों को शामिल करने का विचार किया जा रहा है. बीएस-6 की बसें शामिल होने से यात्रियों को सुगम सुविधाजन यात्रा मिलेगी.

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रोडवेज विभाग ने पिछले साल 800 बीएस-4 की बसें खरीदी थी. विभाग को 1100 बसें खरीदनी थी लेकिन उनमें 800 बसें ही खरीद पाए, जो बाकी बची बसों को खरीदने पर भी विभाग मंथन कर रहा है, लेकिन उससे पहले बीएस-6 की बसों को खरीदने का प्लान बना रहा है. राजस्थान राज्य के अलावा गुजरात राज्य में बीएस-6 बसों के टेंडर भी दे दिए गए है. इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में भी बीएस-6 की बसें खरीदने पर विचार किया जा रहा है.

बीएस-6 से वाहनों की इंजन की क्षमता बढेगी,उत्सर्जन कम होगा. ईंधन क्षमता बढेगी,जिससे रोडवेज विभाग को अच्छे एवरेज बसों से मिलेगा. बीएस-6 की बसों के माइलेज के दावे में फर्जीवाडा नहीं कर पाएंगे. राजस्थान रोडवेज में बीएस-6 की बसें शामिल होने से प्रदेश में 70 फीसदी प्रदूषण कम होगा, जो कि पुरानी कंडम बसों से होने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी.

परिवहन विशेषज्ञ का कहना है कि यूरोप व आस्ट्रेलिया में कई साल पहले बीएस-6 लागू हो चुका है. यह देश बीएस-7 की ओर बढ रहे है. इससे शहरों के प्रदूषण में 40 से 50 फीसदी की कमी आई है.

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