अब पेंशन स्वीकृति के लिए नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर, शुरू हुई ये खास योजना

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 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस से वित्त विभाग के एनआईसी के सहयोग से तैयार की गई ई-पेन्शन और ई-लेखा प्रणाली का वर्चुअल उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समय, धन एवं संसाधनों की बचत के लिए आईटी आधारित पेपरलैस गवर्नेन्स आज के समय की जरुरत है. सभी विभाग नवाचार करते हुए पेपरलैस सिस्टम की दिशा में आगे बढ़े. इससे न केवल संवेदनशील, पारदर्शी, जवाबदेह शासन का संकल्प साकार होगा बल्कि आमजन को भी बेहतर सर्विस डिलीवरी हो सकेगी.

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मुख्यमंत्री ने पेंशन एवं लेखा प्रणाली के सरलीकरण के लिए तैयार किए गए ई-पेंशन और ई-लेखा सिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि इससे सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को जटिलता भरी औपचारिकताओं से निजात मिलेगी और पेंशन स्वीकृति के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. इससे समय की बचत होगी. कार्मिकों के वेतन, मेडिकल, यात्रा बिलों, संवेदकों के भुगतान सहित अन्य लेखा कार्यों में सुगमता होगी.

गहलोत ने कहा कि वित्तीय अनुशासन, विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग, सरकारी काम-काज में मितव्ययता, कुशलता एवं समय की दृष्टि से आईटी का महत्वपूर्ण योगदान है. इसे देखते हुए आईटी विभाग अपने तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिकों की एक ऐसी टीम तैयार करे, जो सरकार की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप सॉफ्टवेयर एवं प्रोग्राम बना सके. इसके लिए हमें किसी बाहरी कम्पनी पर निर्भर नहीं रहना पड़े.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 की चुनौती के बावजूद राज्य सरकार ने कुशल वित्तीय प्रबंधन करते हुए विकास परियोजनाओं को गति दी है. उन्होंने वित्त विभाग के अधिकारियों से कहा कि वित्तीय प्रबंधन को लगातार मजबूत बनाया जाए. ऐसे प्रयास किए जाएं जिससे ऑवरड्राफ्ट की स्थिति पैदा ना हो. राजस्व लगातार बढ़े और लीकेज न हो.

मुख्य सचिव श्री राजीव स्वरूप ने कहा कि ई -पेंशन एवं ई-लेखा सिस्टम पेपरलैस गवर्नेन्स की दिशा में बड़ा कदम है. इससे कामकाज में पारदर्शिता आने के साथ ही सरकारी भुगतान सिस्टम में सुधार होगा. ई-पेंशन से सेवानिवृत्त होने वाले का्मिकों को अपनी पेंशन स्वीकृति के लिए 40 पृष्ठों का जटिल प्रपत्र नहीं भरना होगा.

 

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