राजस्थान में अपराधियों के खिलाफ अब ये बड़ी प्लानिंग

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 जयपुर । शातिर अपराध और अपराधियों से निपटने के लिए राजस्थान पुलिस पहली बार नया प्रयोग करने जा रही है। दरअसल इस बार निशाने पर वे अपराधी हैं जो लोगों को मूर्ख बनाकर उनकी धनराशि हड़पते हैं फिर चाहे वे लॉटरी का झांसा हों, साइबर अपराध हो या फिर कॉपरेटिव सोसायटी या लिमिटेड बैकों की कोइ स्कीम… इस तरह की अपराध में लाखों करोड़ों रुपया हडपने के बाद अक्सर शातिर अपराधी मोबाइल फोन, लैपटॉप, कम्प्यूटर या अन्य डिवाईस का डाटा डिलिट कर देते हैं, लेकिन अब राजस्थान पुलिस ऐसा सैटअप लगाने जा रही है कि जिससे डिलिट किया गया डाटा काफी हद तक रिकवर किया जा सकेगा और इससे उन लोगों को फायदा होगा जो लाखों करोड़ों गवाने के बाद भी सबूतों के अभाव में पूरी तरह से न्याय नहीं पा सकते थे। इस सैटअप पर लाखों रुपया खर्च करने की तैयारी है और पूरी उम्मीद है कि यह नए साल के शुरुआती महीनों में शुरु कर दिया जाएगा। फिलहाल इसकी फाइल गृह विभाग के अफसरों के पास है।

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इस तरह से काम करेगा यह सैटअप

पुलिस मुख्यालय के अफसरों ने बताया कि डिजिटल डिवाइस एक्सट्रैक्शन सिस्टम एक उपकरण होगा जो करीब तीस से पैंतीस लाख रुपए की लागत से लग सकेगा। इसे आॅपरेट करने के लिए भी ट्रेनिंग दी जाएगी ओर यह ट्रेनिंग सबसे पहले इंटेलीजेंस को दी जा सकती है। उसके बाद पुलिस की अन्य एजेंसियों को इस बारे में बताया जाएगा। इंटेलिजेंस अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी के साथ कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच करती है।

फिर चाहे वे बॉर्डर पार से चुपचाप आने वाले जासूस ही क्यों नहीं हो… सभी इंटेलीजेंस के निशाने पर होते हैं। इसके अलावा शातिर अपराधी अपराध के बाद अपनी डिवाइस नष्ट कर देते हैं अब ऐसा करने पर डिवाइस के डाटा को रिकवर किया जा सकेगा। इलेक्ट्रोनिक डिवाइस को लॉक करने के लिए लगाए गए पासवर्ड भी इस सैटअप से नष्ट किए जा सकेंगे। अभी तक पुलिस एजेंसियां इसे निजी तौर पर कराती हैं जिससे सूचनाएं लीक होने का डर रहता है।

 

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