60 वर्ष से कम उम्र के रोगी हो सकते है होम क्वारेंटाइन,देखे विडिओ

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बीकानेर। जिला कलक्टर नमित मेहता ने कहा कि पीबीएम अस्पताल परिसर में जनाना विंग (एमसीएच) में कोरोना पॉजिटिव रोगियों को शिफ्ट किया जाए, इसके लिए यहां 300 बेड लगाए जाएं। नए बेड खरीदने का कार्य मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा अधीक्षक पीबीएम अस्पताल द्वारा कर लिया गया है। अब शीघ्र ही यहां 300 बेड लगा दिए जाएं। साथ ही यह भी देखें कि वर्तमान में जिस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 150 रोगियों को रखा जा रहा है वहां भी शेष खाली रहे भवन में 100 बेड और रखे जाएं, ताकि आने वाले समय में अगर जरूरत पड़े तो इन दोनों स्थानों पर कोरोना रोगियों को रखकर उनका बेहतर इलाज कर सकें। मेहता बुधवार को अपने कक्ष में कोविड-19 की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे।

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होम क्वॉरेंटाईन उम्र के हिसाब से
जिला कलक्टर ने चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से कहा कि पॉजिटिव रोगी आने के बाद होम क्वॉरेंटाइ्रन और अस्पताल में स्थानांतरित करते समय इस बात को भी देख लें कि अगर कम उम्र का व्यक्ति होम क्वॉरेंटाइ्रन होना चाहता हो तो उसे होम क्वॉरेंटाइ्रन कर दिया जाए। मगर साथ में यह भी ध्यान रखें कि होम क्वेंरंटाइन के लिए घर में सभी व्यवस्थाएं हों, लेकिन 60 की उम्र से अधिक का व्यक्ति अथवा किसी अन्य बीमारी से पीडि़त व्यक्ति को होम क्वॉरेंटाइ्रन नहीं किया जाए बल्कि ऐसे मरीजों को अनिवार्य रूप से अस्पताल में ही भर्ती किया जाए।

दो चरणों में की जाए जांच
जिला कलक्टर मेहता ने कहा कि कोरोना पॉजिटिव रोगियों के संपर्क में आने वाले लोगों की दो चरणों में जांच की जाए। प्रथम चरण में रोगी के परिजनों की जांच हो। तथा दूसरे चरण में आफिस या सहकर्मियों की जांच हो। जिससे प्रत्यक्ष सम्पर्क में आने वालों की तुरंत रिपोर्ट आ जाए तथा दूसरे चरण में सहकर्मी दूसरे चरण में वह व्यक्ति शामिल किए जाएं, जिनसे वह पॉजिटिव आने से पूर्व कुछ समय के लिए मिला हो। दो चरणों की जांच के पीछे उद्देश्य यह रहेगा की प्रथम चरण वाले संदिग्ध रोगियों की जांच शीघ्रता से होने से चैन के टूनने में आसानी रहेगी, वहीं दूसरे चरण में कुछ समय के लिए मिले रोगियों से जांच की जाए। साथ ही अगर पॉजिटिव आने वाला व्यक्ति अगर किसी कार्यालय या संस्थान में है तो ऐसे व्यक्ति जो संपर्क में आए हैं उनकी 7 दिन के पश्चात जांच की जाए ताकि अगर प्रारंभिक तौर पर लक्षण कम हो तो 7 दिन बाद लक्षण भी आ सकते हैं और जांच में भी बीमारी का पता आसानी से चल जाएगा।

जांच में सहयोग नहीं तो स्टेट क्वेंरटाइन होंगे
बैठक में जिला कलक्टर को बताया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा जांच में सहयोग नहीं किया जाता है या जांच में टालमटोल किया जाता है तो उसे स्टेट क्वेंरंटाइन कर दिया जाए। इसी तरह जिस संदिग्ध रोगी को अथवा पॉजिटीव को होम क्वॉरेंटाइ्रन किया जाता है तो उसके घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया जाए। जिसमें व्यक्ति का नाम और होम क्वॉरेंटाइ्रन होने की तिथि अंकित की जाए।

3000 जांचे हों प्रतिदिन

जिला कलक्टर ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि अब प्रतिदिन 3 हजार जांच होनी चाहिए। इनमें 1500 जांच शहरी क्षेत्र में तथा 1500 जांच ग्रामीण क्षेत्र में की जाएं। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में 10 सैंपल कलेक्शन प्वाइंट बनाए गए हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में भी सभी उपखंड मुख्यालय पर भी सैंपल कलेक्शन सेंटर की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि जांच का दायरा बढ़ जाने से रोगियों का चिन्हीकरण हो जाएगा और उनका इलाज कर बीमारी पर प्रभावी तरीके से काबू पाया जा सकेगा।

बैठक में यह रहे उपस्थित
समीक्षा बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) ए. एच. गौरी, नगर विकास न्यास सचिव मेघराज सिंह मीना, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र पाल सिंह, बीकानेर उपखण्ड अधिकारी रिया केजरीवाल, शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक रचना भाटिया, उप महानिरीक्षक पंजीयन ऋषिबाला श्रीमाली, सहायक कलक्टर अर्चना व्यास, उपायुक्त उपनिवेशन चन्द्रभान सिंह भाटी, उप निदेशक सूचना एवं प्रद्यौगिकी विभाग के सत्येन्द्र सिंह, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर द्वारा कोविड-19 के लिए बीकानेर के लिए नियुक्त डॉ. देवेंद्र सोनी उपस्थित थे।

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