पौधरोपण कर पर्यावरण संवर्द्धन का लिया संकल्प

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बीकानेर। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य  एवं बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, बीकानेर द्वारा संचालित जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संस्थान परिसर में पौध रोपण एवं पर्यावरण संवर्द्धन का संदेश दिया गया।
वर्चुअल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ शिक्षक एवं पर्यावरणविद् भवानी सोलंकी ने संस्थान द्वारा आयोजित वर्चुअल संवाद कार्यक्रम में कहा कि हर व्यक्ति को पौधरोपण के लिए आगे आना चाहिए। पेड़ पर्यावरण संवर्द्धन के लिए आवश्यक और उसकी सुरक्षा हमारा और समाज का उत्तदायित्व भी है। इसलिए आवश्यक है कि हम सब मिलकर पौधे लगाएं और उनकी देखरेख करें ताकि हर पौधा पेड़ बन सके। चारों तरफ हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण के लिए पौधरोपण जरूरी है।
संस्थान के अध्यक्ष अविनाश भार्गव ने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए भी आमजन को आगे आना होगा, जिससे जंगलों का अस्तित्व बना रहे। पर्यावरण की एतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हुए श्री भार्गव ने पर्यावरण दिवस के शुरूआत के बारे में बताया और कहा कि इतने वर्ष पूर्व ही लोगों ने  पर्यावरण के महत्व को समझ लिया था, अब तो बहुत जरूरी हो गया है कि हम इसे गंभीरता से लें।
संस्थान के निदेशक ओमप्रकाश सुथार  ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि  विकास की दौड़ में कहीं न कहीं हम सभी प्रकृति की उपेक्षा कर रहे हैं। जिसका खामियाजा भी हमे ही भुगतना पड़ रहा है। इसलिए पेड़ों को संरक्षित करना होगा। भारतीय संस्कृति में पेड़, पौधे, नदी आदि पर्यावरण से संबंधित प्राकृतिक संसाधनों की पूजा की जाती है। इसके पीछे इन सभी का महत्व समझने का संदेश छिपा होता है। पौधे लगाने  से ज्यादा जरूरी इनकी देखभाल करना है।

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वर्चुअल कार्यक्रम का संयोजन कर रहे कार्यक्रम अधिकारी महेश उपाध्याय ने कहा कि पर्यावरण का सामान्य अर्थ हमारे चारों ओर के वातावरण से है। इसलिए न सिर्फ हमें हवा, पानी, पेड़, पौधों, मिट्टी की बात करनी है बल्कि इन सभी के साथ अभी लॉकडाउन या कोरोना काल में जो हमारे घरों या कार्यस्थल पर नकारात्मक वातावरण बन रहा है उसे सकारात्मक रखने की जिम्मवारी भी हमारी ही है।
कार्यक्रम सहायक उमाशंकर आचार्य ने असम के झोराहट में रहने वाले जादव मोलाई का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने तीस वर्ष तक लगातार मेहनत और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से 1320 हैक्टेयर बंजर जमीन में पौधे लगाकार उसको हरा-भरा किया।
कार्यक्रम सहायक तलत रियाज ने विश्व पर्यावरण दिवस की अवधारणा एवं इसके माध्यम से आम जन तक स्वच्छता के लिए स्वअनुशासन अपनाने की बात कही।
वर्चुअल संवाद कार्यक्रम में संस्थान के लेखाकार लक्ष्मीनारायण चूरा, श्रीमोहन आचार्य, संदर्भ-व्यक्ति मोनिका सांखला, रोशन परवीन, वहीदा खातून, रेखा छींपा, रेश्मा वर्मा, नीतू चौधरी, सुषमा भाटी, प्रियंका जोशी, ममता पंवार, पूजा गहलोत, भंवरी देवी, सीता प्रजापत, गगनदीप, सरोज प्रजापत, पूजा कच्छावा आदि ने भाग लेते हुए पर्यावरण के सम्बंध में स्वयं के स्तर पर किए गए कार्यांे की जानकरी एवं पर्यावरणीय संदेश देते गीतों की भी प्रस्तुतियां दी।
विश्व पर्यावरण दिवस पर संस्थान द्वारा ऑनलाइन पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर सुनीता गहलोत, बीकानेर, दूसरे स्थान पर  प्रियंका जोशी बज्जू, तीसरे स्थान पर नीतू चौधरी, नोखा और  रेखा छींपा, बीकानेर रही। सांत्वना पुरस्कार प्रियंका तिवाड़ी, लूनकरणसर और रेशमा वर्मा, बीकानेर को  मिला।

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