साइबर अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी में पुलिस, बनाया ये मास्टर प्लान

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राजस्थान में साइबर क्राइम (Cyber Crime) हर साल बढ़ता जा रहा है. साइबर क्राइम को रोकने के लिए राजस्थान अब एक नयी रणनिती के साथ करेगा. राजस्थान में एक्सपर्ट पुलिसकर्मियों का एक पूल गठित किया जायेगा जो कि हाईटेक तरिके से काम करते हुए अपराधियों को जल्द सलाखों के पीछे लाने के लिए बेहतरीन तरिके से काम करेगा. जिसके बाद प्रदेश में साइबर अपराधियों पर नकेल कसी जा सकेगी.

साइबर अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी में पुलिस, बनाया ये मास्टर प्लान prachina in article 1

राजस्थान में साइबर क्राइम पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. साइबर अपराधों के प्रदेश में रोजाना बड़े मामले सामने आ रहे हैं. अपराधी आये दिन नये तरिकों से लोगों को साइबर क्राइम का शिकार बना रहे है. राजस्थान बढते साइबर क्राइम की वजह से देश में सातवे पायदान पर आकर खड़ा हो गया है. इसे रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने अब तक कई तरह की पहल की है जिनके नतीजे भी कई बार सकारात्मक रहे.. लेकिन साइबर क्राइम करने वाले बदमाश भी कभी पिछे नहीं रहे.

हर बार उन्होंने लोगों को शिकार बनाने के नये तरिके इजाद कर लिये. साइबर क्रिमिनल्स ने पुलिस के सामने “तू डाल डाल तो मैं पात पात वाली” चुनौती खड़ी कर दी. इसी चुनौती से निपटने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक नयी रणनिती की राजस्थान में शुरुआत करने की बात कही है. इस रणनिती को जानने से पहले जरुरी है कि हम पहले राजस्थान में होने वाले साइबर क्राइम के बारे में जाने.. चलिये पिछले तीन सालों के साइबर क्राइम को आंकड़ों के जरिये समझते हैं.

वर्ष                               साइबर क्राइम के आंकड़े                 देश में स्थान
2017                                      1304                                             4
2018                                      1104                                             7
2019                                      1762                                             7

आंकड़े बताते हैं कि 2019 में राजस्थान में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढोतरी हुई है. इसे रोकने के लिए सीएम अशोक गहलोत ने अब पुलिस को नया टास्क दिया है. सोशल मीडिया और साइबर तकनीक का दुरुपयोग करने और इनके जरिए होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राजस्थान पुलिस को खुद को तैयार करने के लिए नयी रणनिती के साथ काम करने की जिम्मेदारी दी गयी है. सीएम ने पुलिस अफसरों से कहा कि पुलिस ऎसे अपराधों की तफ्तीश के लिए साइबर मामलों के एक्सपर्ट पुलिसकर्मियों का पूल गठित कर अपराधियों को जेल तक पहुंचाए. सीएम अशोक गहलोत का मानना है कि बदलते समय के अनुरुप अपराधियों ने अपने अपराध करने के तौर तरीकों में बदलाव किया है. प्रदेश की पुलिस भी इन चुनौतियों से मुकाबले के लिए अपने को आधुनिक बनाए.

पुलिस अधिकारियों की माने तो साइबर अपराध को रोकने के लिए पिछले कुछ सालों में संसाधनों में भी बढोतरी की गयी है. शहर में नये साइबर थाने की स्थापना की गयी, लेकिन जब तक शहर के सभी थानों में साइबर क्राइम रोकने के लिए संसाधन नही होंगे तब तक आम लोगों को परेशानी होगी. साइबर अपराध को रोकने के लिए जरुरत है कि राजस्थान के सभी थानों से एसे पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया जाये जिनका झूकान नयी तकनिक की ओर हो और उसके बाद उन्हे साइबर क्राइम से निपटने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाये जिससे आम आदमी अपने नजदीकी थाने पर जाकर भी साइबर क्राइम की शिकायत दे सके और पुलिस उन अपराधियों को सलाखों के पीछे ला सके. इसके अलावा पुलिसकर्मियों का पूल गठित होने से उनमे कॉर्डिनेशन बढ़ सकेगा जिससे सभी पुलिसकर्मी नये अपराधों की जानकारी व उनसे निपटने का तरिका एक दूसरे से साझा कर सकेंगे.

उम्मीद है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद पुलिस विभाग अब जल्द प्रदेश में एक्सपर्ट पुलिसकर्मियों का एक पूल गठित कर लेगा जो कि आपस में कॉर्डिनेशन करते हुए प्रदेश के आम लोगों को साइबर क्राइम के चंगुल से बचाकर जल्द अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज सकेगा.

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