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राजस्थानी लोकसंगीत एवं सारंगी वादन

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गंगाशहर , विरासत संवर्द्धन संस्थान, बीकानेर के तत्वावधान में टी.एम.ओडिटोरियम में राजस्थानी लोकसंगीत एवं विख्यात सारंगी वादक उस्ताद लियाकत अली खां का सारंगी वादन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम आयोजक विरासत संवर्द्धन संस्थान के प्रर्वतक टोरमल लालाणी ने सभी का स्वागत किया व अपनी अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम की शुरूआत में संगीत की दुनिया में अवार्ड जीत चुके व अनेक फिल्मों में काम कर चुके मसहूर सारंगी वादक उस्ताद लियाकत अली खां ने अनेक फिल्मी गानों व गजलों की धुनों को सारंगी के माध्यम से प्रस्तुत की तो पूरा ओडिटोरियम वाह वाही से गूंज उठा। राजस्थानी गानों के माध्यम से अंशु शर्मा ने ’सोने री घड़ाद्यो म्हारे पायलड़ी, कोमल पुगलिया ने बीरा ओ बीरा औल्यू’ मधु तिवारी ने ’सुपनां रे म्हारो भंवर मिला दिजे रे’, लता मलघट ने ’जलो म्हारी जोड़ रो’, लोपा मुद्रा आचार्य ने ’म्हारा साजनिया’, आकांक्षा भोजक ने दल बादली में चमके जी तारा’, सुनिता स्वामी ने ’बाय चढ्या था भंवर जी’, पिन्टू स्वामी ने गजल ’अपने साये  भी अश्को को छुपाकर रोना, गौपाल चांवरिया ने ’बाईसा रा बीरा’ आदि अनेक प्रस्तुतियां दी। साथ ही मनोहर दैया, पीयूष नाहटा, अजीज इरासाद आदि ने भी अपनी प्रस्तुतियां दी। संगतकारों में तबले पर उस्ताद गुलाम हूसैन, ढोलक पर ताहिर हुसैन, ऑरगन पर असद अली आदि से संगत की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ में मां सरस्वती की मूर्ति के आगे दीप प्रज्ज्वलन टोडरमल लालाणी, उस्ताद लियाकत अली खां, कन्हैयालाल बोथरा, जतनलाल दूगड़, सोहन चौधरी ने किया। कार्यक्रम का आगाज करते हुए जतनलाल दूगड़ ने संस्थापक टोडरमल लालाणी की कला व संस्कृति के प्रति अप्रितम लगाव व संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।bikaner hulchul राजस्थानी  लोकसंगीत एवं सारंगी वादन IMG 20200105 185509 400x225

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