कोरोना वैक्सीन पर सीरम इंस्टीट्यूट ने दी अच्छी खबर

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कोरोना माहमारी के वायरस की चपेट में आ चुकी पूरी दुनिया राहत की उम्मीद कर रही है। लोगों की नजरें इस वक्त कोरोना वैक्सीन पर टिकी हुई है। ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी वैक्‍सीन निर्माता कंपनी, सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने एक राहत भरी खबर दी है। कंपनी का कहना है कि मार्च तक देश को वैक्सीन मिल सकती है।

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एक खबर के अनुसार ‘सीरम इंस्टीट्यूट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश जाधव ने दावा किया है कि देश को अगले साल मार्च तक कोरोना की वैक्सीन मिल सकती है। उन्‍होंने बताया कि कि भारत में कोविड-19 वैक्‍सीन पर रिसर्च बेहद तेजी से चल रही है। देश में दो वैक्‍सीन कैंडिडेट्स का फेज-3 ट्रायल चल रहा है और एक फेज-2 में है और भी वैक्‍सीन कैंडिडेट्स पर भारत में रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम चल रहा है।

डॉ जाधव ने कहा, “हम हर साल वैक्‍सीन की 70 से 80 करोड़ डोज बना सकते हैं।  हमारी करीब 55 फीसदी आबादी 50 साल से कम उम्र की है, लेकिन उपलब्‍धता के आधार पर वैक्‍सीन पहले हेल्‍थकेयर वर्कर्स को मिलनी चाहिए।  हम दिसंबर 2020 तक 6 से 7 करोड़ डोज तैयार कर लेंगे लेकिन लाइसेंसिंग का क्लियरेंस मिलने के बाद ही वो बाजार में आ पाएंगी। उसके बाद हम सरकार की इजाजत से और डोज तैयार करेंगे। “

वहीं इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा था कि हम उम्मीद कर रहे हैं अगले साल की शुरुआत में एक से अधिक स्रोतों से देश को टीका मिल जाएगा। हमारे विशेषज्ञ देश में वैक्सीन के वितरण को कैसे शुरू किया जाए, इसकी योजना के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं।  सरकार अलग-अलग तरह की वैक्‍सीन की उपलब्‍धता पर विचार कर रही है।  उन्‍होंने कहा कि उम्रवर्ग के हिसाब से अलग-अलग वैक्‍सीन को मंजूरी दी जा सकती है क्‍योंकि एक वैक्‍सीन शायद एक खास आयु वर्ग पर असरदार हो, दूसरे पर नहीं।

बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन पर काम कर रहा है – जिसमें एस्ट्राजेनेका -ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से संभावित रूप से बड़े पैमाने पर उत्पादन शामिल है। इसके लिए टीके विश्व स्तर पर विकसित और परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं।

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