श्रीदेवी से बढ़िया नागिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में न हुई है, न होगी

श्रीदेवी से बढ़िया नागिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में न हुई है, न होगी  श्रीदेवी से बढ़िया नागिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में न हुई है, न होगी images 4

जब-जब भी कहीं बीन की सुनाई देती है, मुझे फटाक से श्रीदेवी याद आ जाती है. क्यों? क्योंकि मेरे ज़हन में एक तस्वीर अटकी हुई है. सफ़ेद ड्रेस में अपनी दोनों हथेलियों को नागिन के फन की तरफ फैलाए और आंखों में कहर भरके खड़ी हुई श्रीदेवी. आंखें फैला रखी हैं और न जाने किस रंग के कांटेक्ट लेंसेस हैं, जो आंखों को डरावना बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस तस्वीर को दिमाग ने यूं जज़्ब कर लिया है कि बीन की आवाज़ से सीधे यही दिखाई पड़ती है. और यहां आकर इस आर्टिकल की हेडिंग जस्टिफाई हो जाती है. वाकई श्रीदेवी से ज़्यादा अच्छी तरह नागिन का किरदार किसी ने भी नहीं निभाया है. फिर भले ही आप रीना रॉय का नाम क्यों न ले आएं. हालांकि ये निजी राय ही है और आपको इससे असहमत होने का पूरा अधिकार है.
1986 में आई ‘नगीना’ ने परदे पर नागिन कैसी दिखनी चाहिए इसके स्टैण्डर्ड सेट किए. ज़हर सिर्फ रगों में नहीं आंखों में भी कैसे हो सकता है, इसका ट्युटोरियल था श्रीदेवी का ये रोल. ये गाना तीन दशक बाद भी विजुअली इतना स्ट्रांग है कि इसे लूप पर देखा जा सकता है.

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