विजय दिवस पर जानिए, कारगिल युद्ध के दौरान खेले गए भारत-पाक मैच की कहानी.

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साल 1983 के बाद हर नए क्रिकेट विश्वकप में उम्मीदें बनती और बिखरती जा रही थीं. 1987 से 2007 के बीच कुल छह विश्वकप खेले गए और भारत उनमें कभी नहीं जीत सका. लेकिन एक तसल्ली हमेशा रही कि विश्वकप जीतें या नहीं, पाकिस्तान के खिलाफ हमेशा झंडा ऊंचा रखा.

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आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक मैच की, जो कि 8 जून 1999 को मैनचेस्टर में खेला गया. 1983 के बाद फिर से इंग्लैंड लौटे विश्वकप में मोहम्मद अज़हरुद्दीन के कंधों पर लगातार तीसरी बार विश्वकप की बागडोर थी. पहली बार टूर्नामेंट को 12 टीमों को दो ग्रुप वाले फॉर्मेट में बांटा गया. दोनों ग्रुप में से तीन-तीन टीमों को सुपरसिक्स में पहुंचना था. भारतीय टीम सुपरसिक्स में पहुंची और यहां उसका मुकाबला पाकिस्तान से था.

पहली बार दो देशों में जंग के बीच हुआ मैच:
1999 विश्वकप के हालात राजनौतिक तौर पर बहुत अलग थे. भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया ये ऐसा मैच था, जो जंग के माहौल में खेला गया. 1999 में मई के महीने में पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों ने कश्मीर के कारगिल इलाके पर कब्ज़ा कर लिया, जिसके बाद जंग की शुरूआत हुई. 8 जून को जब भारत और पाकिस्तान की टीमें विश्वकप मुकाबले के लिए आमने-सामने थीं. तब ही दोनों देश जंग शुरू कर चुके थे.

1999 कारगिल की तस्वीर. फोटो: India Today

लेकिन फिर भी दोनों टीमें मैदान पर उतरीं क्योंकि ये भारतीय क्रिकेट का वो दौर नहीं था, जब पाकिस्तान के साथ राजनीतिक रिश्तों को खेल के मैदान पर घसीटा जाता था.

इस मैच पर दोनों मुल्कों की जंग का असर साफ देखा गया. इस मैच में ऐसे दो पाकिस्तानी दर्शकों को स्टेडियम से बाहर निकाल दिया गया. जो अपने हाथ में एक प्लेकार्ड लेकर आए थे, जिस पर लिखा था,

“वर्ल्डकप और कारगिल – दोनों हमारा है”

सौरव गांगुली की बीमारी:
सौरव गांगुली 1999 विश्वकप में कमाल की फॉर्म में थे. उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले से पहले छह मैचों में 350 रन ठोक दिए थे. लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ इस मैच के दौरान सौरव गांगुली खेलने नहीं आए. उन्हें बीमार बताया गया. लेकिन उनकी इस बीमारी की खूब चर्चा हुई. पाकिस्तानी मीडिया ने तो यहां तक कहा कि

”शोएब अख्तर की रफ्तार से डरकर गांगुली ने मैच से अपना नाम वापस ले लिया है.”

इनफॉर्म गांगुली मैच में टीम के साथ नहीं थे, जिसके बाद उनकी जगह सदागोपन रमेश ने ओपनिंग की.

कारगिल में जंग के बीच मैच में क्या हुआ:
इस मुकाबले में अज़हर ने टॉस जीतते ही बैटिंग का फैसला किया. पहली बार टूर्नामेंट में टीम इंडिया बिना सचिन-सौरव की ओपनिंग जोड़ी के उतरी. सदगोपन रमेश ने सचिन के साथ मिलकर धीमी लेकिन अच्छी शुरुआत देने की कोशिश की. दोनों ने 11.1 ओवर में 37 रन जोड़े लेकिन इसके बाद रज़्जाक की अंदर आती गेंद पर रमेश(20 रन) बोल्ड हो गए.

राहुल द्रविड़ 1999 विश्वकप में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे. फोटो: ICC

इसके बाद क्रीज़ पर राहुल द्रविड़ की एंट्री हुई. वो द्रविड़ जो वनडे टीम में खुद को साबित करने के लिए उस विश्वकप में जी-जान लगा रहे थे. टीम इंडिया भले ही सुपर सिक्स के बाद बाहर हो गई. लेकिन द्रविड़ उस विश्वकप के हाइऐस्ट रन स्कोरर थे.

द्रविड़ ने सचिन के साथ मिलकर 50 रनों की पार्टरनिशप की. लेकिन 97 के स्कोर पर सचिन(45 रन), अज़हर की गेंद पर कैच आउट हो गए. सचिन से पाकिस्तान इतना खौफज़दा था कि उनके आउट होने का जश्न पाकिस्तान की संसद में भी मनाया गया.

पाकिस्तानी संसद में हुआ ऐलान:
जब तेंडुलकर आउट हुए तब पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने पाकिस्तानी संसद की कार्यवाही के बीच यह सूचना दी-

”सचिन तेंडुलकर आउट हो गया है.”

इसके बाद जंग के तनाव के बावजूद वहां मौजूद सांसदों ने भी इस पर खुशी ज़ाहिर की.

1999 विश्वकप की सचिन की तस्वीर. फोटो: ICC

सचिन के बाद जडेजा(6 रन) का हाल तो आया-राम गया-राम वाला रहा. द्रविड़ ने कप्तान अज़हर के साथ टीम को आगे बढ़ाया. भारतीय टीम फिर भी 50 ओवर में 227 रन ही बना सकी. द्रविड़ ने 61 और कप्तान अज़हर 59 रनों की पारी खेली.

वसीम अकरम और अज़हर महमूद ने बेहद किफायती गेंदबाज़ी की और भारतीय बल्लेबाज़ों को हाथ खोलने का मौका नहीं दिया.

अब लक्ष्य का पीछा करने उतरा पाकिस्तान:
वसीम अकरम की कप्तानी में पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेली पाकिस्तानी टीम के लिए ये स्कोर बहुत बड़ा नहीं था. लेकिन उस दिन भारत का एक ऐसा बोलिंग अटैक लाइन पर था, जिसने कसम खाई थी कि भले ही विश्वकप ना मिले, लेकिन इन हालात में पाकिस्तान से हार बर्दाश्त नहीं हो सकती.

कर्नाटक के गेंदबाज़ों ने खत्म कर दिया मैच:
भले ही आज भारतीय टीम में गिने-चुने कर्नाटक के क्रिकेटर्स हों. लेकिन साल 1999 की उस टीम में वेंकटेश प्रसाद, जवागल श्रीनाथ, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ी मौजूद थे.

जहां बल्ले से द्रविड़ ने कमाल किया था, वहीं गेंद से प्रसाद, श्रीनाथ और कुंबले ने मैच का रुख पलट दिया. पाकिस्तान की पारी की शुरुआत में ही श्रीनाथ ने अफरीदी(6 रन) को कैच आउट करवाकर चलता कर दिया.

वेंकटेश प्रसाद और इंज़माम उल हक. फोटो: ICC

इसके बाद इजाज़ अहमद (11 रन), सलीम मलिक (6 रन), सईद अनवर (36 रन) और अज़हर महमूद (10 रन) को 100 रन से पहले ही आउट करके प्रसाद, कुंबले और श्रीनाथ ने पाकिस्तान को मुश्किल में डाल दिया.

इसके बाद इंज़माम और मोईन खान ने कुछ कोशिश की. लेकिन वेंकटेश प्रसाद ने किसी की एक नहीं चलने दी. एक के बाद एक विकेट झटकते हुए वेंकटेश ने अपने वनडे करियर का पहला और इकलौता पांच विकेट पूरा करके पाकिस्तान की उम्मीदों को खत्म कर दिया.

उनके अलावा श्रीनाथ ने तीन और कुंबले दो विकेट चटकाए. इन तीनों कर्नाटक के स्टार्स ने किसी और गेंदबाज़ को एक भी विकेट नहीं लेने दिया. पाकिस्तान की टीम 180 के स्कोर पर ढेर हो गई और भारत इस मैच को 47 रनों से जीत गया.

आईसीसी अंपायर डेविड शेफर्ड ने 92 टेस्ट और 172 वनडे मैचों में अंपायरिंग की है,

डेविड शेफर्ड ने एक ओवर में करवाई 7 गेंदें:
पाकिस्तान की पारी के 31वें ओवर तक भारतीय टीम मैच में बेहतर स्थिति में थी. लेकिन इस 31वें ओवर में अंपायर डेविड शेफर्ड गिनती ही भूल गए. खैर, इंडिया-पाकिस्तान मैच का प्रेशर भी कुछ ऐसा ही होता है. वो भी जब मैच जंग के बीच विश्वकप में खेला जा रहा हो तो. शैफर्ड ने कुंबले से पारी के 31वें ओवर में छह की बजाए सात गेंदें फेंकवा दी. बाद में स्क्रीन पर देखने पर पता चला कि कुंबले एक गेंद ज़्यादा फेंक गए हैं. हालांकि ओवर की उस आखिरी गेंद पर भारत को ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ और इंज़माम ने सिर्फ एक रन ही लिया.

इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम सुपर सिक्स में पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ एक मैच जीतकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई, जबकि पाकिस्तान की टीम विश्वकप के फाइनल तक पहुंची. फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को आठ विकेट से हराकर खिताब अपने नाम किया था.

भारत भले ही टूर्नामेंट नहीं जीता, लेकिन कहते हैं ना कि

”विश्वकप जीतो ना जीतो, बस पाकिस्तान से मत हारना.”

1999 की उस भारतीय टीम ने भी वही किया था.

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