कोविड-19 हॉस्पिटल की कहानी, मरीज की जुबानी

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कोविड-19 संक्रमण के डर के साये में कोविड पॉजिटिव हो जाने की सूचना आधे हौसलें तोड़ देती है लेकिन सकारात्मक माहौल, चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सकों का व्यवहार इस डर को दूर करने के साथ-साथ बीमारी से लड़ने का हौसला भी देता है। पीबीएम अस्पताल के एमसीएच विंग में भर्ती हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हदा कोलायत के प्रधानाचार्य कपिल भार्गव ने अपनी कहानी कुछ इन शब्दों में बयान की। कपिल बताते हैं कि 31 अक्टूबर को कोरोना पॉजिटिव आने के बाद एक बार तो वे घबरा गए थे लेकिन उसके तत्काल बाद पीबीएम प्रशासन की तरफ से उनकी तबीयत जानने के लिए फोन आया और उनसे पूछा गया कि क्या वह एडमिट होना चाहते हैं।
कपिल बताते हैं कि क्योंकि उन्हें बुखार था इसलिए वह अस्पताल गए और वहां एडमिट हो गए। मेन गेट पर कुछ फॉर्मेलिटीज के बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया गया और उनका इलाज चालू हो गया।
भार्गव बताते हैं कि इलाज के दौरान उनका डर जाता रहा। सामान्य तौर पर सरकारी अस्पताल में इलाज को लेकर बाकी लोगों की तरह उनके मन में कई भ्रांतियां और सवाल थे लेकिन यहां की सफाई व्यवस्थाएं और स्टाफ की नियमित मॉनिटरिंग के कारण से अब बहुत बेहतर महसूस कर रहे हैं। चिकित्सक भी दिन में दो तीन बार उन्हें चेक करने के लिए आ रहे हैं।
कपिल ने बताया कि खाने की गुणवत्ता को लेकर उन्हें कोई समस्या नहीं हुई और इतने नकारात्मक बीमारी के बावजूद वार्ड का सकारात्मक माहौल , नर्सिंग कर्मियों का सहयोगात्मक रवैया उनके लिए बहुत संबल देने वाला है।

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