लद्दाख में तैनात किए टी-90 और टी-72 टैंक, दुश्मनों को सिखाएंगे सबक

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भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ है. दोनों देशों के बीच बने जंग के हालात को शांत करने के लिए कई बार सैन्य कमांडर स्तर की बैठकें भी हो गई हैं, लेकिन चीन नियंत्रण रेखा से अपने कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं दिख रहा है. चीन (China) के अड़ियल रवैये को देखते हुए भारत (India) ने सीमा  पर अपनी पोजीशन मजबूत करनी शुरू कर दी है. भारतीय सेना ने रविवार को लेह से 200 किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख के चुमार डेमचोक क्षेत्र में टैंक और पैदल सेना के वाहनों को तैनात किया है.

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भारतीय सेना की ओर से LAC पर चुमार-डेमचोक क्षेत्र में बीएमपी-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के साथ टी-90 और टी-72 टैंकों की तैनाती की गई है. इन टैंक की खास बात ये है कि ये पूर्वी लद्दाख में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में सटीत तरीके से दुश्मन पर हमला कर सकते हैं.

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर टी-90 और टी-72 टैंकों की तैनाती पर बात करते हुए 14 कोर्प्स के चीफ ऑफ स्टाफ के मेजर जनरल अरविंद कपूर ने फायर एंड फ्यूरी भारतीय सेना का एकमात्र गठन है. दुनियाभर के देशों के ऐसे कठोर इलाकों में यंत्रीकृत बलों को तैनात किया गया है. टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों और भारी बंदूकों का इस इलाके में रखरखाव करना एक चुनौती है. चीन के साथ चल रहे तनाव के बारे में बताते हुए मेजर जनरल अरविंद कपूर ने कहा कि चालक दल और उपकरण की तत्परता सुनिश्चित करने के लिए, जवान और मशीन दोनों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं.

टी-90 भीष्म टैंक में 3 तरह के ईंधन डाले जाते हैं
पूर्वी लद्दाख के चुमार-डेमचोक क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारतीय सेना के टी-90 भीष्म टैंक को तैनात किया गया है. आगे आने वाले समय में यहां का तापमान माइनस में चला जाता है. ऐसे में इन ट्रैंकों में तीन प्रकार के ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है ताकि सर्दियों में यह जम न जाए.

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