बीकानेर के बैंककर्मी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे।

बीकानेर के बैंककर्मी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे।  बीकानेर के बैंककर्मी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे। IMG 20191022 174118

आॅल इण्डिया बैंक एम्पलाॅयज एसोसिएशन एवं बैंक एम्पलाॅयज फेडरेशन आॅफ इण्डिया के आह्वान पर बैंको के विलय के विरोध में आज 22 अक्टूबर 2019 को बीकानेर के बैंककर्मी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे।

आज सुबह 11 बजे बैंक कर्मचारियों की वाहन रैली बैक आॅफ बडौदा स्टेशन रोड़ से रवाना हुई जो केईएम. रोड़ होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची, पूरे रास्ते बैंक कर्मचारियों ने ’’बैंको में मर्जर नहीं चलेगा’’ ’’वित्त मंत्री हाय हाय’’ ’’एआईबीए जिन्दाबाद’’ ‘‘ हौसले बुलंद है आज बैंक बंद है’’ इत्यादि नारे बडे जोशपूर्ण ढंग से लगाये।

बैंक कर्मियों की मुख्य मंागे –
10 बैंकों (पंजाब नेशनल बैंक, इण्डियन बैंक, ओबीसी बैंक, यूनाईटेड बैंक आॅफ इण्डिया, आन्ध्रा बैंक, यूनियन बैंक, सिंडीकैंट बैंक, काॅर्पोरेशन बैंक, इलाहाबाद बैंक, केनरा बैंक) का मर्जर करके चार बड़ी बैंको की स्थापना का विरोध करना
जनविरोधी बैंकिंग सुधारों को रोकना
दण्डात्मक शुल्क लगाकर ग्राहकों को प्रताड़ित नहीं करना,
ग्राहकों की जमा राशि पर ब्याज दर में बढ़ोतरी,
जमापूंजी की पूरी तरह से सुरक्षा,
सभी बैंकों में पर्याप्त स्टाफ की भर्ती की जाए
ग्राहकों से सेवा शुल्क में वृद्धि नहीं करना,
खराब ऋणों के वसूलीे में तेजी लाना,
नौकरी एवं नौकरियों की सुरक्षा पर हमले रोके जाए

आज की हड़ताल को राजस्थान प्रदेश बैंेक एम्पलाॅयज यूनियन, बीकानेर ईकाई के सचिव काॅ. वाई.के. शर्मा, आॅल राजस्थान एसबीआई एम्पलाॅयज एसोसिएशन के अध्यक्ष सीताराम कच्छावा, बैंक आॅफ बड़ौदा यूनियन के उप महासचिव रामदेव राठौड़ व अक्षय व्यास, काॅर्पोरेशन बैंक के जयशंकर खत्री, रामधन सुथार आदि ने संबोधित करते हुए कहा कि बड़ी बैंको की स्थापना आमजन के हितों के खिलाफ है क्योंकि बड़ी बैंके बड़े ऋण करेगी, जो कि औद्योगिक घरानों को दिये जाऐंगे एवं बड़ी राशि का ऋण खराब होने से बैंको के दिवालिया होने की सभावनाऐं बढ़ेगी। वर्ष 2019 तक बैंक के डुबत ऋणों की राशि 13 लाख करोड पहुंच चुकी है।

पूंजीपतियों के हक में सरकार द्वारा पांच लाख करोड़ के ऋण माफ किये जा चुके है। इस राशि की वसूली छोटे ग्राहकों पर लेन-देन पर सेवा शुल्क लगाकर की जा रही है। हमारे देश को बड़ी बैंक के स्थान पर अधिक बैंको की जरूरत है। छोटी जमाओं पर ब्याज दर में वृद्धि करने की आवश्यकता है। देश में बैंक शाखाओं के विस्तार की आवश्यकता है क्योंकि भामाशाह कार्ड, गैस सब्सिडी व सरकार की सभी योजनाओं का लाभ आमजन तक बैंक के माध्यम से ही पहुंचता है। आज हमारे देश के 40 प्रतिशत हिस्से में बैंक की सेवाएं उपलब्ध नहीं है। आठ वर्ष पूर्व अमेरिका में आई मंदी के बाद 20जी देशों द्वारा लिये गये निर्णय की पालना में केन्द्र सरकार आगामी लोकसभा सत्र में एफ.आर.डी.आई. विधेयक ला रही है जिसके अनुसार बैंक के दिवालिया होेने पर एक लाख रूपये की राशि से अधिक का भुगतान करने की सरकार या बैंक की जबाबदारी या देनदारी नहीं हो सकेगी। बड़ी बैंकों में आज भी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी हाथों में है। सरकार तेजी से बैंकों के निजीकरण की ओर बढ़ रही है व विलय के बाद बनी बड़ी बैंके भी खराब स्थिती होने पर औद्योगिक घरानों को बेचे जाने की पूरी उम्मीद है।

आज प्रदर्शन का नेतृत्व एस.बी.आई. के सीताराम कच्छावा, जे.पी. वर्मा, बैंक आॅफ बडौदा से रामदेव राठौड, माया सुथार, अनिता भाटी, पूर्णाराम लेखाला, के.के. डागा, इलाहाबाद बैंक से रामधन सुथार, आर.के. मोदी, काॅर्पोरेशन बैंक से जयशंकर खत्री, यूनियन बैंक से हरि प्रकाश खत्री, अशोक सोलंकी, बलदेव व्यास, नरेन्द्र सिंह, यूकों बैंक से सुभाषचन्द्र दैया, अनुराग सैनी, यूनाईटेड बैंक से रमेश चुग, ओबीसी बैंक से संदीप सिंह जावा, बैंक आॅफ इण्डिया से रामस्वरूप, सेन्ट्रल बैंक इण्डिया से राहुल ने किया।

संयोजक रामदेव राठौड एवं उप संयोजक जयशंकर खत्री ने संगठन के कर्मठ, जुझारू सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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