2021 में फिर हो सकता है वायरस का हमला, जानिए क्‍या कह रहे हैं विशेषज्ञ

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साल 2020 पूरी तरह कोरोना वायरस (Corona Virus) से लड़ने में बीत गया. हालांकि  2021 के आते-आते विश्‍व भर में और खासतौर पर भारत में विकसित की गईं कोविड वैक्‍सीन (Covid Vaccine) ने पूरी दुनिया को राहत दी है. अभी तक भारत में 75 लाख से ज्‍यादा लोगों को वैक्‍सीन दी जा चुकी है और कोरोना के मामलों में भी अपेक्षित रूप से कमी देखी गई है. इसके बावजूद विशेषज्ञ वायरस को लेकर निश्‍चिंत नहीं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस कभी भी लौटकर आ सकता है.

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इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बॉयोलॉजी (सीएसआईआर) के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल बता रहे हैं कि भारत की पहली कोविड19 वैक्सीन बनाने में तकनीक का काफी योगदान रहा और एक बड़ी आबादी को संक्रमण (Infection) से सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीन ही जरूरी है. इसके साथ ही डॉ. अनुराग कोरोना महामारी  (Corona Pandemic) में बचाव की तैयारियों के अलावा सचेत रहने की भी सलाह दे रहे हैं.

कोरोना के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने में तकनीक के योगदान को आप किस तरह देखते हैं?

तकनीक की सहायता से ही हमारे फ्रंटलाइन वर्कर और स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोरोना से लड़ने के लिए आधुनिक किस्म के संसाधन जैसे प्रभावी जांच किट, सेल्फ प्रोटेक्शन किट, मॉलीक्यूलर सर्विलांस मैकेनिज्म, दवाएँ और अन्य डिजिटल उपकरण उपलब्ध हो सके. तकनीक की सहायता से ही हम वायरस के म्यूटेशन को ट्रैक कर पाए, कोरोना जांच के लिए भारतीय किट को विकसित कर पाए, पर्याप्त मात्रा में दवा और उपकरणों को बना सके. केवल जांच और इलाज में ही नहीं, तकनीक की मदद से ही लॉकडाउन के समय हमारे घरों में सामान्य दिनचर्या का सामान घर के दरवाज़े तक पहुंचा. बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के साथ ही तकनीक की वजह से ही हम कोरोना महामारी के समय अपने परिजनों और दोस्तों के साथ संपर्क में रह सके.

अब जबकि भारत में लगातार कोरोना के मामलों में कमी आ रही है, क्या हमें वास्तव में वैक्सीन की जरूरत है?

दो प्रमुख कारण हैं जिसकी वजह से कोरोना के मामलों में कमी होने के बावजूद हमें वैक्सीन की जरूरत है. अभी भी ऐसे अधिकांश लोग हैं जिनमें वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित नहीं हुई है और इस वर्ग के संक्रमण की चपेट में आने की संभावना अधिक है. दूसरा बड़े शहरों में अभी जो कोरोना के मामलों में कमी देखी जा रही है वह अस्थाई भी हो सकती है. मैं आपको उदाहरण से समझाता हूं दिल्ली में तेजी से कोरोना के मामलों में कमी देखी जा रही है क्योंकि यहां की आधी से अधिक आबादी में कोविड19 वायरस के प्रति एंटीबॉडी देखी गई है. अन्य अधिक जनसंख्या घनत्व वाले शहरों में भी यही स्थिति देखी गई है लेकिन यह बदल सकती है, ब्राजील में कुछ समय पहले ही हर्ड इम्यूनिटी देखी गई थी, किंतु वहां 70 प्रतिशत सीरो पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद भी मनौस शहर में संक्रमण तीव्रता के साथ बढ़ा. मनौस में हुए इस आउट ब्रेक की संभवत दो वजह हो सकती हैं. पहली यह कि लोगों का इम्यूनिटी स्तर कम हो रहा हो, दूसरा यह भी संभव है कि कोविड के किसी नये स्ट्रेन ने इम्यूनिटी पर हमला किया हो. दोनों ही संभावनाओं पर शोध किया जा रहा है. यह भी देखा गया है कि वैक्सीन से सामान्य इम्यूनिटी की अपेक्षा बेहतर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (इम्यूनिटी) मिलती है. वैक्सीन से मिलने वाली इम्यूनिटी को अधिक दिन तक चलने वाली मजबूत इम्यूनिटी कहा जा सकता है.

सीएसआईआर ने खुद अपने संस्थान में सीरो सर्वेक्षण कराया है, उसके बारे में कुछ बताएं?

पिछले साल सीएसआईआर की 37 लैबोरेटरीज़ और केंद्रों में हमने एक सीरो सर्वेक्षण कराया. सर्वेक्षण में सीएसआईआर के वैज्ञानिक, छात्र, सुरक्षा, सफाई कर्मचारी और हाउसकीपिंग के लोगों को शामिल किया गया. इस समूह में न केवल विभिन्न सामाजिक आर्थिक समुदाय के बल्कि, विभिन्न जनसंख्या घनत्व के लोग भी थे. सर्वेक्षण कोरोना के अति गंभीर समय अगस्त से सितंबर 2020 तक के बीच किया गया. रिपोर्ट में हमने कोरोना के सौ मिलियन मामले देखे, जबकि वास्तव में यह आंकड़ा तीस गुना अधिक था. हमने यह भी देखा कि पचास प्रतिशत ऐसे लोग जिनमें एंटीबॉडी देखी गई उनमें कोरोना संक्रमण के किसी भी तरह के लक्षण नहीं देखे गए थे.

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