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20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज में क्या-क्या ऐलान किया?

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पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 मई को 20 लाख करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की. नाम दिया ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’. हालांकि पीएम ने इस पैकेज की डिटेल नहीं दी थी. 13 मई को शाम चार बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मीडिया के सामने आईं. उन्होंने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के बारे में जानकारी दी. साथ में थे वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर.

सरकार ने MSMEs, NBFC, एमएफआई, डिस्कॉम, रियल एस्टेट, टैक्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को राहत देने के लिए 15 घोषणाएं की.

सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, कुटीर उद्योग और गृह उद्योग के लिए तीन लाख करोड़ रुपये का कोलैटरल फ्री ऑटोमैटिक लोन का प्रवाधान किया गया है.  लोन के लिए पर्सनल गारंटी की जरूरत नहीं है. लोन की समय सीमा चार साल की होगी.  31 अक्टूबर, 2020 से इस स्कीम का लाभ मिलेगा.

 

# एनपीए वाले और स्ट्रेस्ड MSME  को 20 हजार करोड़ रुपये का सबऑर्डिनेट लोन दिया जाएगा. इससे दो लाख से ज्यादा यूनिट को लाभ मिलेगा.

# जो MSME अच्छा कर रहे हैं और वो बिजनस का विस्तार करना चाहते हैं, अपना आकार और क्षमता बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सुविधा नहीं मिल पा रही है, उनके लिए ‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिए फंडिंग मिलेगी.

परिभाषा बदली

वित्त मंत्री ने बताया कि MSME यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की परिभाषा बदल दी गई है. निवेश की लिमिट में बदलाव किया गया है. एक करोड़ निवेश या 10 करोड़ टर्नओवर पर सूक्ष्म उद्योग का दर्जा दिया जाएगा. इसी तरह 10 करोड़ निवेश या 50 करोड़ टर्नओवर पर लघु उद्योग का दर्जा दिया जाएगा. वहीं 20 करोड़ निवेश या 100 करोड़ टर्नओवर पर मध्यम उद्योग का दर्जा दिया जाएगा.

#200 करोड़ तक का टेंडर ग्‍लोबल नहीं होगा. यह एमएसएमई के लिए बड़ा कदम है. इसके अलावा एमएसएमई को ई-मार्केट से जोड़ा जाएगा.

# जो एमएसएमई तनाव में हैं, उन्‍हें सबऑर्डिनेट डेट के माध्यम से 20,000 करोड़ की नकदी की व्यवस्था की जाएगी. जो एमएसएमई सक्षम हैं, अपना विस्तार करना चाहती हैं, उन्हें कारोबार विस्तार के लिए 10,000 करोड़ के ‘फंड्स ऑफ फंड’ के माध्यम से मदद दी जाएगी.

‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिए MSMEs के लिए 50 हजार करोड़ रुपये इक्विटी इंफ्यूजन किया जाएगा.

ईपीएफ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार अब अगस्‍त तक कंपनी और कर्मचारियों की तरफ से 12 फीसदी + 12 फीसदी की रकम EPFO में जमा करेगी. इससे करीब 75 लाख 22 हजार कर्मचारियों को फायदा मिलेगा.

# सरकार के इस ऐलान का फायदा सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा, जिनके पास 100 से कम कर्मचारी हैं और 90 फीसदी कर्मचारी की सैलरी 15,000 रुपये से कम है.

 

इसके अलावा बड़ी कंपनियों के लिए EPF योगदान 12-12 प्रतिशत से कम करके 10-10 प्रतिशत किया गया है. लेकिन केंद्र और पब्लिश सेक्टर यूनिट में यह 12 प्रतिशत ही रहेगा. सरकार के इस कदम से 6750 करोड़ रुपए लोगों के हाथ में ज्यादा आएगा.

एनबीएफसी के लिए

नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के लिए 30,000 करोड़ की विशेष लिक्विडिटी स्कीम लाई जा रही है.

एनबीएफसी के लिए 45,000 करोड़ की पहले से चल रही योजना का विस्तार होगा. वहीं आं​शिक ऋण गारंटी योजना का विस्तार होगा. इसमें डबल ए या इससे भी कम रेटिंग वाले एनबीएफसी को भी कर्ज मिलेगा.

डिस्कॉम यानी बिजली वितरण कंपनियों की मदद के लिए इमरजेंसी लिक्विडिटी 90,000 करोड़ रुपये दी जाएगी.

रियल एस्टेट के मामले में एडवाइजरी जारी होगा कि सभी प्रोजेक्ट को मार्च से आगे छह महीने तक मोहलत दी जाए.

इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन बढ़ा दी गई है. इनकम टैक्स रिटर्न की तारीख 30 नवंबर 2020 तक बढ़ा दी गई है. इसी तरह ‘विवाद से विश्‍वास’ स्‍कीम की डेडलाइन को 31 दिसंबर, 2020 तक कर दी गई है. पहले ये 30 जून तक के लिए था.

नॉन सैलरी पेमेंट के लिए TDS, स्पेसिफाइड ​रेसिप्टस के लिए TCS रेट 31 मार्च 2021 तक मौजूदा रेट से 25 प्रतिशत  घटा दी गई है. इससे 50,000 करोड़ रुपए की लिक्विडिटी लोगों के हाथों में रहेगी. यह फैसला कल से ही लागू हो जाएगा. इनकम टैक्स में ट्रस्ट, LLP को सभी पेंडिंग फंड तत्काल रूप से दिए जाएंगे. TDS विभिन्न तरह के आय के स्रोत पर काटा जाता है. इसमें सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन शामिल हैं.

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