’’क्या करोगे तब जब प्राण तन से निकले’’ कार्यक्रम तीन घंटें तक श्रोता भाव विभोर

’’क्या करोगे तब जब प्राण तन से निकले’’ कार्यक्रम तीन घंटें तक श्रोता भाव विभोर

 बीकानेर(Bikaner News), 12 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा के सान्निध्य में सोमवार को डागा, सेठिया पारख मोहल्ले के महावीर भवन में स्वाधीनता दिवस, जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ दिवस व सहस्त्रशताब्दी वर्ष के उपल़क्ष्य में सोमवार को हुए ’’क्या करोगे तब जब प्राण तन से निकले’’ कार्यक्रम में श्रोता तीन घंटें तक भाव विभोर होकर तन्मयता से चेतना गीतों ’’ में खोए रहे।
कार्यक्रम में चैन्नई बंधुबेलड़ी  के मोहन भाई-मनोज भाई आत्म चेतना के गीतों की प्रस्तुतियां के सम्मान में अनेक श्रावक-श्राविकाएं नीवीं व अन्य तपस्याएं की। नीवीं व आयम्बिल तपस्या के दौरान बिना तेल,घी के लूखा भोजन एक वक्त किया। सोमवार को ही पर्व विशेष के दौरान हजारों बलि किए गए प्राणियों की आत्म कल्याण की विशेष प्रार्थना की गई तथा बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या की ।
भगवान महावीर की जय व त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की’’ आदि नारें के साथ चले कार्यक्रम में मोहन भाई-मनोज भाई ने राजस्थानी, हिन्दी व गुजराती भजनों, आत्म चेतना गीतों के साथ प्रभु की स्तुति वंदना के भक्ति गीत ’’वीर प्रभु भगवान हमसे प्राणों से भी प्यारा है’’, ’’भगवान महावीर ने मुझे अपनाया है, रास्ते से उठाकर सिने से लगाया है’’ सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
उन्होंने  आत्म चेतना के भजन ’’चंद दिनों का जीना रे बंदे, ये मकड़ी का जाल, ’’जन्म-जन्म का साथ है, हमारा तुम्हारा’’, शरीर पर पड़ेगा ताला, आंख में जाला’’, ’’उम्र छोटी सी वह भी ढलने लगी देखते-देखते ’’, ’इस जहां ने ऐसे ठुकरा दिया, आग ने मुझे सीने से लिपटा लिया’’, ’’माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है’’, ’’जिन्दगी का नाम कभी खुशी-कभी गम’’, ’मनुष्य जीवन अनमोल’’, ’’ आया कहां से कहां जाना’’, ’’ रोग, बुढ़ापा मृत्यु पूछे, ’  ’’जीव अकेला आया, अकेला ही जाने वाला है’’ आदि के माध्यम से बताया कि जीवन को इस तरह जीएं कि मत्यु बेहतर हो जाए। उन्होंने भजनों के साथ  अपने व्याख्यान में बताया कि जीव के श्वास निकलने के 48 मिनट बाद भी उसमें आत्मा व प्राण रहता है। इसके बाद जीवात्मा कर्मों के अनुसार 84 लाख योनियों में किसी जूण में जन्म लेती है । अच्छे कर्म करने पर देवगति व अन्य पर नारकीय जीवन मिलता है।
चैन्नई बंधुबेलड़ी ने भजन-प्रवचन व्याख्यान में कहा कि 65 साल के बाद वृृद्ध को आउडडोर इलाज करवावें, अस्पताल में भर्ती नहीं करवावें, मृृत्यु के वक्त स्नेह व आत्मीय भाव से प्रभु स्मरण करें। किसी की मृृत्यु पर कटाक्ष करने की बजाए प्रभु नाम स्मरण करते हुए उनकी सद््गति की प्रार्थना करें।  प्रतिदिन प्रार्थना करें ’’ हे जीव अकेला आया, अकेला जाने वाला, संबंधी, स्वजन, सम्पति, सत्ता, शरीर कोई तेरा नहीं है। हे जीवात्मा जाग अंदर से जाग’’ । मैं परमात्मा जैसी शुद्ध पवित्र आत्मा हूं।
कार्यक्रम के लाभार्थी बाबू लाल, गेवरचंद, संतोकचंद, नरेन्द्र कुमार मुसरफ परिवार की ओर से बंधुबेलड़ी भाइयों का तथा विरायतन के ट्रस्टी कोलकाता के सोहन लाल सिंघवी का अभिनंदन किया गया।  बीकानेर के सुप्रसिद्ध गायक सुनील पारख रे बंधु बेलड़ी की प्रस्तुतियों पर स्वरों से साथ दिया।

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