क्यों भारत में कई राज्यों में लौट रहा है कोरोना?

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साल 2021 से वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों तक की उम्मीद थी कि साल कोरोना के खात्मे की शुरुआत होगा, हालांकि ऐसा लग नहीं रहा. ब्रिटेन के बाद दक्षिण अफ्रीका और अब फिनलैंड में भी वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन मिले हैं. इस बीच भारत में भी कोरोना संक्रमण के मामले एक नवंबर के बाद एक बार फिर तेजी से बढ़े. तो क्या ये देश में कोरोना की दूसरी लहर का हमला है?

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स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब देश में कोरोना के कुल मामले बढ़कर एक करोड़ 9 लाख 91 हजार 651 हो गए हैं. इनमें से कुल एक लाख 56 हजार 302 लोगों की जान जा चुकी है. वैसे तो बीते 3 महीनों में बड़ी तेजी से मरीज ठीक होने लगे थे और संक्रमण में भी तेजी से गिरावट आई लेकिन अब नया ट्रेंड डरा रहा है. कोरोना के मरीजों की संख्या में लगातार छठवें दिन बढ़त हुई है. बता दें कि 15 फरवरी से केस लगातार बढ़े हैं. यहां तक कि पिछले चौबीस घंटे में 14 हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं

ये मामले पूरे देश में तो नहीं, लेकिन 4 राज्यों में कोहराम मचा रहे हैं. महाराष्ट्र, केरल, मध्यप्रदेश और पंजाब में मामले उफान पर हैं. महाराष्ट्र में कोरोना का नया स्ट्रेन आ चुका है, जिसके बाद से कई दिनों से लगातार 6 हजार से भी ज्यादा केस आ रहे हैं. बाकी तीन राज्यों में भी यही हाल है. इस बार पैटर्न ज्यादा डरावना लग रहा है क्योंकि शहरी क्षेत्रों की बजाए मामले ग्रामीण इलाकों में बढ़ते दिख रहे हैं. वहीं कोरोना की देश में शुरुआत के दौरान शहरी आबादी ज्यादा प्रभावित थी. शहर में चूंकि इलाज की सुविधा है इसलिए मामले तब भी काबू किए जा सके लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण हालात बेकाबू हो सकते हैं.

इस बीच बार-बार ये सवाल आ रहा है कि ऐसा क्यों हो रहा है. क्यों केवल कुछ राज्यों और वहां भी ग्रामीण इलाकों में मामले ज्यादा दिख रहे हैं. इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई कारण देते हैं. एक वजह तो कॉन्टैक्स ट्रेसिंग है. बता दें कि कोरोना चूंकि तेजी से फैलता है इसलिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग काफी जरूरी है ताकि मरीज के संपर्क में आए सभी लोगों पर नजर रखी जा सके और जरूरत पड़ने पर इलाज दिया जा सके.

उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र की बात करें तो वहां फरवरी के दूसरे हफ्ते में कोरोना के मामले जिन इलाकों से आए, वे मिले-जुले इलाके हैं. अमरावती अपेक्षाकृत ग्रामीण इलाका है, जहां कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की दर काफी कम है. यही वजह है ये जगह बीमारी का हॉटस्पॉट बन चुकी है. यहां तक कि स्थानीय प्रशासन ने अब बंदी का एलान कर दिया है. मुंबई, पुणे, थाणे और नागपुर के भी कमोबेश यही हाल हैं.

दूसरा कारण है- लोगों का डर खत्म हो जाना. पहले वैज्ञानिकों से लेकर डॉक्टरों तक के पास इस वायरस के बारे में खास जानकारी नहीं थी, इसलिए लगातार सचेत रहने की बात की जा रही थी. इलाज की जानकारी न होने के कारण लोगों में डर बना हुआ था. वहीं इटली और अमेरिका में लोगों की मौत की दर ज्यादा होने की सूचनाएं भी लगातार मीडिया में आ रही थीं, जिससे भारत की आबादी डर से ही सही, लेकिन सचेत थी.

अब हालात दूसरे हैं. भारत में वैक्सीन आ चुकी है और नियम के मुताबिक दी भी जाने लगी है. इसके अलावा कोरोना की वैसे कोई निश्चित दवा तो नहीं, लेकिन कई दवाएं हैं, जिनसे मरीज को राहत मिल पाती है. लॉकडाउन के दौरान अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्टर में भी इस बीमारी के लिहाज से कई बदलाव हुए. लिहाजा अब बड़ी आबादी इसे लेकर निश्चिंत हो रही है और नियमों का उतनी सख्ती से पालन नहीं कर रही.

अगर महाराष्ट्र ही की बात करें तो इस राज्य में जनवरी में 14000 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में चुनाव हुए थे. प्रचार के दौरान और वोटिंग के रोज लोग घरों से बाहर निकले और करीब से संपर्क में आए. इससे अमरावती और सतारा जैसी जिलों में कोरोना के मामले एकाएक तेजी से ऊपर हुए. मुंबई की लाइफलाइन कहलाने वाली लोकल ट्रेन शुरू हो चुकी है. दफ्तर या पढ़ाई या किसी दूसरे काम से लोग आने-जाने लगे हैं. ऐसे में संपर्क को टालना आसान बात नहीं.

मास्क पहनने को लेकर कोताही भी सामने आ रही है. मास्क अनिवार्य होने के कारण लोग मास्क लगाते तो हैं लेकिन केवल उन्हीं जगहों पर जहां पुलिस की पकड़ाई में आने का खतरा हो. ठुड्डी पर मास्क लटकाकर भी लोग घूमते दिख जाते हैं. ये सारी वजहें कोरोना को बढ़ाने की कॉमन वजहें हैं. दूसरी ओर स्कूलों का खोला जाना भी एक कारण की तरह देखा जा रहा है. ध्यान दें तो पाएंगे कि उन सभी राज्यों में कोरोना का प्रकोप बढ़ा, जहां स्कूल खुल चुके हैं. बच्चों पर वायरस का खतरा भले ही कम हो लेकिन वे वाहक का काम करते हैं. ऐसे में घरों में साथ रहने वाले लोगों के अलावा बुजुर्गों और बीमारों पर गंभीर खतरा है.

इस सारी वजहों के अलावा एक अफवाह भी फैल रही है. लोग मानने लगे हैं कि कोरोना वायरस असल में कुछ है ही नहीं, बल्कि ये विदेशी ताकतों की फैलाई हुई अफवाह है. मालूम हो कि कोरोना वायरस को लेकर अब तक कई कंस्पिरेसी थ्योरी आ चुकी हैं. ये भी उनमें से एक है. ऐसे लोग वायरस को अफवाह मानते हुए किसी नियम-कायदे या फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे, जिससे मामले बढ़े हैं.

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