फ्लौरोसिस रोग सम्बन्धी जोन स्तरीय कार्यशाला आयोजित

फ्लौरोसिस रोग सम्बन्धी जोन स्तरीय कार्यशाला आयोजित  फ्लौरोसिस रोग सम्बन्धी जोन स्तरीय कार्यशाला आयोजित WhatsApp Image 2020 08 19 at 14

बीकानेर। लगातार 0.5 पीपीएम से ज्यादा फ्लोराइड की मात्रा वाले पेयजल का सेवन करने से फ्लौरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। ये बीमारी आपकी हड्डियों व दांतों के लिए घातक हो सकती है। वर्षा जल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग कर वर्ष पर्यंत उपयोग करना इसका प्रचलित व प्राकृतिक बचाव है। फ्लोरोसिस बीमारी को लेकर बुधवार को स्वास्थ्य भवन सभागार में जोन स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई जिसमे बीकानेर सहित श्रीगंगानगर, चूरू व नागौर जिले के डिप्टी सीएमएचओ, लैब तकनीशियन व सलाहकार शामिल हुए। कार्यशाला स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ व आईएनआरइएम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई। चिकित्सा निदेशालय जयपुर से आए राष्ट्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ एम.एल. सालोदिया ने बताया कि गरीब व दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे भारतीयों के भोजन में कैल्सियम, विटामिन व आयरन के अभाव के चलते 0.5 पीपीएम से अधिक मात्रा वाले पानी का लगातार सेवन भी फ्लौरोसिस की बीमारी दे सकता है। उन्होंने कोविड-19 के चलते रही सुस्त प्रगति को पीछे छोड़ राष्ट्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम को नए जोश से आगे बढाने का आह्वान किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.एल. मीणा ने बताया कि फ्लौरोसिस की रोकथाम के लिए मात्र स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के बजाय जलदाय विभाग, नगर-ग्रामीण निकाय, केमिस्ट व डेंटिस्ट का भी समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सुदूर ग्राम स्तर तक विभाग को जोर लगाने की हिदायत दी। डिप्टी सीएमएचओ डॉ इंदिरा प्रभाकर ने फ्लोरोसिस से बचाव, पहचान व उपचार सम्बन्धी मापदंडों की जानकारी दी। पीएचइडी की ओर से शामिल चीफ केमिस्ट द्वारा पानी में फ्लोराइड का स्तर जांच करने के तरीकों पर चर्चा की। यूनिसेफ के नवनीत मिश्रा व आईएनआरइएम फाउंडेशन के अरविंद प्रजापत द्वारा विभिन्न जिलों की डेमोग्राफिक परिस्थितियों अनुसार राष्ट्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम के संचालन का खाका रखा। जिला सलाहकार फ्लोरोसिस महेंद्र जायसवाल ने एनपीपीसीएफ कार्यक्रम में जिले की अब तक की प्रगति से अवगत करवाया। कार्यशाला कोविड-19 सम्बन्धी प्रोटोकॉल के साथ आयोजित की गई।

फ्लौरोसिस रोग सम्बन्धी जोन स्तरीय कार्यशाला आयोजित prachina in article 1

क्या है फ्लौरोसिस ?
डॉ. बी.एल. मीणा ने जानकारी दी कि लगातार अधिक फ्लोराइड युक्त पानी, तम्बाकू, सुपारी, काली चाय, काला नमक इत्यादि का सेवन व फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का उपयोग करने पर हड्डियों में टेढ़ापन, कुबड़ापन, दांतों में पीलापन को फ्लौरोसिस कहते है। फ्लौरोसिस से बचने के लिए वर्षा जल एकत्र कर पिएँ, ईमली, आंवला, नीम्बू, हरी सब्जियां, दूध-दही, विटामिन सी, डी, कैल्सियम व आयरन युक्त खाद्यों का सेवन करना चाहिए।

फ्लौरोसिस रोग सम्बन्धी जोन स्तरीय कार्यशाला आयोजित WhatsApp Image 2020 08 19 at 14

COMMENTS