अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीवार जो बाइडन अपने प्रतिद्वंद्वी व रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप से बढ़त बना चुके हैं। 264 इलेक्टोरल वोट के साथ बाइडन व्हाइट हाउस के करीब पहुंचते दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ट्रंप को फिलहाल 214 वोट मिले हैं। हालांकि, मतों की गिनती अभी जारी है, लेकिन अमेरिका में भावी राष्ट्रपति की तस्वीर साफ होती दिखाई देने लगी है। ऐसे में एक स्वाभाविक सवाल यह उठता है कि आखिर जो बाइडन यदि अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो वह भारत के लिए कितने अनुकूल और उपयोगी रहेंगे। इसका भारत-अमेरिकी रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वक्त भारत के साथ बने मधुर संबंधों को गति मिलेगी? आखिर इस मामले में क्या कहते हैं विशेषज्ञ। क्या है उनकी राय?
चीन के खिलाफ भारत को मिलती रहेगी अमेरिकी मदद
यहां एक सवाल उठता है कि क्या जो बाइडन चीन के मुद्दे पर भारत का सहयोग करते रहेंगे। इस सवाल पर प्रो. हर्ष पंत (ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन) का कहना है कि चीन के खिलाफ अमेरिकी विदेश नीति पर बहुत व्यापक असर नहीं पड़ेगा। इस मामले में अमेरिका को भारत का सहयोग मिलता रहेगा। प्रो. पंत का मानना है कि अमेरिका में चीन के खिलाफ एक बड़ी लॉबी है। वह काफी प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि चीन को सुपर पॉवर बनने से रोकने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नीति में बहुत बदलाव नहीं है। इसका लाभ भारत को मिलेगा। पंत ने कहा कि बाइडन के पास भारत विरोध का कोई स्पेश नहीं है। इसलिए भारत-चीन के टकराव की स्थिति में अमेरिका का झुकाव भारत की ओर निश्चित रूप से होगा। बाइडन चाहकर भी इस नीति में बदलाव नहीं कर सकते। इस मामले में वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ही अनुसरण करेंगे।
कश्मीर मुद्दे पर पार्टी के अंदर हो सकता है गतिरोध
प्रो. पंत ने कहा कि कश्मीर का मुद्दा थोड़ा अलग है। इस मामले में बाइडन को अपनी ही पार्टी के अंदर उपजे गतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। कश्मीर के कुछ मामलों में मॉडरेट और लेफ्ट विंग का मतभेद सामने आ सकते हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारत विश्व परिदृष्य में एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरा है। भारत बहुत मजबूत स्थिति में है। इसलिए उसकी बात को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए मुश्किल होगा। दूसरे, अमेरिका ने कहा कि वह मित्र देशों का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे में अमेरिका का कश्मीर के प्रति रुख में कोई बड़ा बदलाव आने वाला नहीं है। पंत ने कहा कि बहुत संभव है कि बाइडन इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीति का ही अनुसरण करें।
डेमोक्रेट्स भारत के परंपरागत सहयोगी व समर्थक
बता दें कि डेमोक्रेटिक पार्टी की नीति सदैव भारत के पक्ष में रही है। डेमोक्रेट्स भारत के परंपरागत सहयोगी व समर्थक रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय-अमेरिकी लोगों का झुकाव डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर ज्यादा रहता है। हालांकि, इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में स्थिति थोड़ी उलट है। राष्ट्रपति ट्रंप के शासन काल में भारत-अमेरिका के संबंध पहले से प्रगाढ़ हुए हैं। दोनों देशों के बीच सामरिक सुरक्षा और कारोबार के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार हुआ है। भारत के प्रति अमेरिकी रवैये में भी बदलाव आया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कश्मीर समेत आतंकवाद और चीन से टकराव के के मुद्दे पर भारत के रुख का समर्थन किया है। राष्ट्रपति ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे दोस्त साबित हुए हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या बाइडन के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच पहले की तरह ही मधुर होंगे।






