बीकानेर | भारतीय संस्कृति ओर मानव जीवन में भक्ति भावना भगवान के प्रति आस्था अधिक हैंे भारतवर्श में पत्थर को भी भगवान मान कर पूजते हैं यह इश्ट देवताओं के प्रति सच्ची श्रद्धा हैं लेकिन इस श्रद्धा के साथ अगर कोई किसी मूर्ति में चंचलता आ जाये तो इस सम्बध में हमारे षास्त्र यह कहते है कि प्राणीयों में कश्ट व राजा को परेषानी होती हैं लेकिन अगर राजा कि जगह राश्ट्र के सर्वोच्च पद पर बैठे नेताओ को परेषानी उत्पन्न हो सकती हैंे इस सम्बध मे ‘‘ज्योर्तिविदाभरणे पुस्तक‘‘ के उत्पात प्रकरण में यह लिखा हैं कि –
यतः प्रतिमावेकृतम् ।
अनिमित्तचलन भड्गस्वेदाश्रुतिपात जल्पनाद्यानि।
लिड्गार्चायतनानां नाषाय नरेन्द्रदेषानां ।। 19 ।।
उक्त ष्लोक में यह स्पश्ट है की देवताओं की मूर्ति खण्डित हो जाय तो राजा का अकस्मात अनिश्ठ होता है। यदि मूर्ति में चंचलता आ जाय तों प्राणियों को कश्ट होता हैं यदि देवता की मूर्ति के नेत्रो से आसू बहने लगे तों विश्णु भगतों वेद पाठियो तथा दानकर्ता को कश्ट होता हैं । अभी मैने दिनांक 29 जुलाई 2019 को सायं 6 बजकर 31 मिन्ट पर टी वी न्यूज पर समाचार सुना कि राजस्थान के सादूलषहर, हरियाणा, यू.पी., बिहार आदि जहा पर नंदी ने दूध पीया हैं या गणेष भगवान ने भी पुर्व में दूध पीया हैं वहाॅ आमजनों को पीडा एवं कश्ट का सामना करना पडेगा।






