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Bikaner में पहली बार विराट चैत्र नवरात्रि शास्त्रोक्त महायज्ञ का शुभारंभ

Bikaner। कृष्णगिरी शक्तिपीठ के पीठाधीपति जगद्गुरु पूज्य श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज ने गुरुवार को कहा कि चैत्र नवरात्रि केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण, शक्ति साधना और जीवन के संतुलन का पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि यह पर्व व्यक्ति को नई ऊर्जा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है।

गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन परिसर में बीकानेर के इतिहास में पहली बार आयोजित हो रहे वैदिक एवं शास्त्रोक्त नौ कुंडीय विराट चैत्र नवरात्रि महायज्ञ महामहोत्सव के अवसर पर अपने उद्बोधन में उन्होंने यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने वैश्विक स्तर पर समस्त सनातन धर्मावलंबियों को हिन्दू नववर्ष (नवसंवत्सर) की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रकृति, समय और सृष्टि के नए चक्र की शुरुआत मानी जाती है।

शास्त्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पुराणों के अनुसार इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इसे सृष्टि का प्रथम दिवस माना जाता है। यह पर्व हमें जीवन में नए आरंभ और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देता है। महामहोत्सव में बीकानेर सहित देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु दिव्य आध्यात्मिक वातावरण से लाभान्वित हो रहे हैं।

उन्होंने नवरात्रि को साधना का श्रेष्ठ काल बताते हुए मंत्र जाप, ध्यान और उपासना को मन एवं आत्मा को सशक्त बनाने का माध्यम बताया। कथा प्रसंग में भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि जब रावण पर विजय कठिन प्रतीत हुई, तब उन्होंने नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना कर विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया। जीवन की कठिनाइयों में आस्था और शक्ति साधना ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।

प्रातःकालीन सत्र में आयोजन स्थल पर बनाए गए साधना कक्ष में जगद्गुरु के सान्निध्य में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। काशी से पधारे विद्वान पंडितों के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से ‘ॐ ह्रीं बटुकाय नमः’ एवं ‘ॐ माहेश्वराय नमः’ मंत्रों का जाप किया। आगामी 11 दिनों तक बीज मंत्रों के जाप के साथ श्रद्धालुओं को प्रदान किए गए कुबेर लक्ष्मी यंत्र एवं विशेष साधना सामग्री की सिद्धि हेतु दिव्य साधना शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

दोपहर के सत्र में वैदिक विधि से काशी के विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ नौ कुंडीय अति विराट यज्ञ में आहुतियां प्रारंभ की गईं। इस महायज्ञ में लगभग 7 हजार किलो मेवा, 10 हजार चंदन की लकड़ियां और 3 हजार किलो घी का उपयोग किया जा रहा है।


विश्व ब्रह्मांड का दिव्य शिवलिंग बीकानेर में, दर्शन का आह्वान

जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज ने बताया कि बीकानेर, जो ‘छोटी काशी’ के नाम से प्रसिद्ध है, अब एक और दिव्य आध्यात्मिक सौभाग्य का साक्षी बना है। उन्होंने कहा कि आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में पूज्य शंकर स्वामीजी द्वारा 70 वर्षों तक केवल जल ग्रहण करते हुए 10 करोड़ मंत्र जाप से सिद्ध किया गया अद्वितीय शिवलिंग अब बीकानेर की धरती पर स्थापित हुआ है।

उन्होंने बताया कि अपने अंतिम समय में शंकर स्वामीजी को भगवान शिव के दर्शन हुए और उन्होंने यह शिवलिंग जगद्गुरु को सुपुर्द करने का निर्देश दिया। इसी परंपरा के तहत यह शिवलिंग अब बीकानेर पहुंचा है। इस दिव्य शिवलिंग का प्रतिदिन सायंकाल विभिन्न पवित्र द्रव्यों से लगभग आठ घंटे तक अभिषेक पूजन किया जाएगा। उन्होंने सभी बीकानेरवासियों से दर्शन कर जीवन को धन्य बनाने का आह्वान किया और कहा कि श्रद्धापूर्वक दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।