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प्रयास करने के लिए हो सर्वज्ञ और बनाने के एक आदमी उन्मुख वरिष्ठ साध्वी शशि प्रभा मीटर

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बीकानेर, 18 जुलाई। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री मणि प्रभ सूरिश्वर की आज्ञानुवर्ती, साध्वी सज्जनश्रीजी म.सा की शिष्या वरिष्ठ साध्वी, प्रवर्तिनी, शशि प्रभा म.सा के सान्निध्य में बुधवार को ढढ्ढा कोटड़ी में प्रवचन में कहा कि सर्वज्ञ परमात्मा की वाणी सुनकर स्वयं सर्वज्ञ बनने का पुरुषार्थ व प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि परमात्मा ने आत्म शुद्धि,आत्मोत्थान, आत्म कल्याण के अनेक मार्ग बताएं है। दुर्लभ मनुष्य जीवन में व्यक्ति आत्म उत्थान कर सर्वज्ञ बन सकता है। जैन धर्म में आत्म कल्याण व उत्थान के कठिन व सरल मार्ग बताएं गए है। सबसे सरल मार्ग में स्वयं का अवलोकन करते हुए परमात्मवाणी को आचरण, व्यवहार व क्रिया में क्रियान्वित करना है।
उन्होंने कहा कि आत्मो उत्थान व सर्वज्ञ बनने के लिए विभाव से स्वभाव की ओर जाना होगा तथा विकटा को छोड़ना होगा। फिजुल की सांसारिक बातों से मन, वचन व क्रियाओं को दूर कर परमात्मा में लगाना है। मनुष्य की अधिकतर समस्याएं मन के कारण होती है। पुण्योदय के भाव जागृृत नहीं होते है।
उन्होंने कहा कि सर्वज्ञ बनने के लिए अनासक्ति के साथ देव, गुरु व धर्म के भाव रोम-रोम में लाने है। प्रसन्नचित व प्रफुलित होकर प्रभु की भक्ति, वीतराग परमात्मा, सिद्धों व गंुरुओं द्वारा रचित शास्त्र व सूत्रों का वाचन कर उस पर चिंतन मनन कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर होना है।
पूर्व में साध्वी सौम्यगुणा श्रीजी ने कहा कि निष्काम भाव से प्रभु को रिझाएं, उनके प्रति समर्पण के आत्म भाव प्रकट करें। अपने को परमात्मा का व परमात्मा को अपना माने।  सांसारिक रिश्ते व संबंध कुछ वर्षों तक रहते है लेकिन आत्म व परमात्मा संबंध अक्षुण रहता है।
’’शांत-सुधारस’’ का वांचन आज से-प्रवर्तिनी साध्वी शशि प्रभा जी.म.सा. के सान्निध्य मंे शुक्रवार से प्रवचन स्थल पर महोपाध्याय विनय विजय जी.म.सा. द्वारा विरचित और आचार्य विजय रत्न सेन सूरिश्वर जी.मसा. द्वारा आलेखित ’’ शांत सुधारस’’ का वाचन विवेचन किया जाएगा। इस ग्रंथ में 12 भावनाओं का निरुपण है। इस ग्रंथ का अध्ययन व श्रवण कर आत्माएं मोक्ष प्रेमी बनकर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ सकती है। ’’शांत-सुधारस’’  पवित्र ग्रंथ को साध्वीश्रीजी को बहराने का लाभ कन्हैयालाल, महावीर कुमार व नमन कुमार नाहटा ने लिया।
अभिनंदन- प्रवचन स्थल पर बाड़मेर मूल के हाल ही मालेगांव प्रवासी साध्वी समय प्रभा के परिजन शांति लाल व डामर चंद छाजेड़ व मुंबई के नव रतन पारख का श्रीसंघ की ओर से अभिनंदन किया गया। छाजेड़ परिवार की ओर से प्रभावना का भी लाभ लिया गया।

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