इस योग ने बढ़ाया महाशिवरात्रि का महत्व, जानिए शुभ मुहूर्तऔर पूजन विधि

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इस साल महाशिवरात्रि पर्व 1 मार्च को है. इस बार महाशिवरात्रि पर दो शुभ संयोग बनने के साथ पंचग्रही योग भी बन रहा है. ऐसे में शुभ संयोग में महाशिवरात्रि पर शिव आराधना करने पर सभी भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य ही पूरी होंगी. दरअसल महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं. दरअसल महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं.

हजारों सालों से विज्ञान ‘शिव’ के अस्तित्व को समझने का प्रयास कर रहा है. जब भौतिकता का मोह खत्म हो जाए और ऐसी स्थिति आए कि ज्ञानेंद्रियां भी बेकाम हो जाएं, उस स्थिति में शून्य आकार लेता है, और जब शून्य भी अस्तित्वहीन हो जाए तो वहां शिव का प्राकट्य होता है. शिव यानी शून्य से परे. जब कोई व्यक्ति भौतिक जीवन को त्याग कर सच्चे मन से मनन करे तो शिव की प्राप्ति होती है. उन्हीं एकाकार और अलौकिक शिव के महारूप को उल्लास से मनाने का त्योहार है महाशिवरात्रि. हर साल यह पर्व फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है.

शुभ योग:

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इस बार महाशिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ परिघ योग बनेगा. धनिष्ठा और परिघ योग के बाद शतभिषा नक्षत्र और शिव योग का संयोग होगा. ज्योतिषशास्त्र में परिघ योग में पूजा करने पर शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है.

शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए:

शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन ज्योतिष उपाय करने से आपकी सभी परेशानियां खत्म हो सकती हैं. महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है. इस दिन का प्रत्येक घड़ी-पहर परम शुभ रहता है. कुवांरी कन्याओं को इस दिन व्रत करने से मनोनुकूल पति की प्राप्ति होती है और विवाहित स्त्रियों का वैधव्य दोष भी नष्ट हो जाता है. महाशिवरात्रि में शिवलिंग की पूजा करने से जन्मकुंडली के नवग्रह दोष तो शांत होते हैं विशेष करके चंद्रजनित दोष जैसे मानसिक अशान्ति, माँ के सुख और स्वास्थ्य में कमी, मित्रों से संबंध, मकान-वाहन के सुख में विलम्ब, हृदयरोग, नेत्र विकार, चर्म-कुष्ट रोग, नजला-जुकाम, स्वांस रोग, कफ-निमोनिया संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है और समाज में मान प्रतिष्ठा बढती है.

भांग अर्पण से घर की अशांति, प्रेत बाधा तथा चिंता होती है दूर:
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से व्यापार में उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है. भांग अर्पण से घर की अशांति, प्रेत बाधा तथा चिंता दूर होती है. मंदार पुष्प से नेत्र और ह्रदय विकार दूर रहते हैं. शिवलिंग पर धतूर के पुष्प-फल चढ़ाने से दवाओं के रिएक्शन तथा विषैले जीवों से खतरा समाप्त हो जाता है. शमीपत्र चढ़ाने से शनि की शाढ़ेसाती, मारकेश तथा अशुभ ग्रह-गोचर से हानि नहीं होती. इसलिए श्रीमहाशिवरात्रि के एक-एक क्षण का सदुपयोग करें और शिवकृपा प्रसाद से त्रिबिध तापों से मुक्ति पायें.

ग्रहों का योग:
इस वर्ष महाशिवरात्रि 01 मार्च को मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि पर ग्रहों का विशेष योग बनने जा रहा है. दरअसल इस बार मकर राशि में पंचग्रही योग का निर्माण हो रहा है. मकर राशि में शनि, मंगल, बुध, शुक्र और चंद्रमा ये पांचों ग्रह एक साथ रहेंगे. इसके अलावा लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति भी रहेगी.

महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहू्र्त:- 

महाशिवरात्रि तिथि:- 1 मार्च 2022

महाशिवरात्रि निशिता काल: 1 मार्च (रात 12:14 से लेकर 1:05 तक)

महाशिवरात्रि प्रथम प्रहर: 1 मार्च (शाम 06:23 से लेकर 09:31 तक)

महाशिवरात्रि द्वितिय प्रहर: 1 मार्च (रात 09:32 से लेकर 12:39 तक)

महाशिवरात्रि तृतीय प्रहर: 1 मार्च (रात 12:40 से लेकर 03:47 तक)

महाशिवरात्रि चतुर्थ प्रहर: 2 मार्च (सुबह 03:48 से लेकर 06:54 तक)

 

महाशिवरात्रि के दिन राशि अनुसार कुछ विशेष उपाय 

  • मेष: बेलपत्र अर्पित करें.
  • वृष: दूध मिश्रित जल चढ़ाएं.
  • मिथुन: दही मिश्रित जल चढ़ाएं.
  • कर्क: चंदन का इत्र अर्पित करें.
  • सिंह: घी का दीपक जलाएं.
  • कन्या: काला तिल और जल मिलाकर अभिषेक करें.
  • तुला: जल में सफेद चंदन मिलाएं.
  • वृश्चिक: जल और बेलपत्र चढ़ाए.
  • धनु: अबीर या गुलाल चढ़ाएं.
  • मकर: भांग और धतूरा चढ़ाएं.
  • कुंभ: पुष्प चढ़ाएं.
  • मीन: गन्ने के रस और केसर से अभिषेक करें.
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