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भारत ने 73 साल बाद बैडमिंटन में रचा इतिहास, भारतीय खेल इतिहास का गौरवशाली पल

नई दिल्ली: पहली बार किया गया कमाल हमेशा यादगार होता है। थॉमस कप के इतिहास में भारतीय बैडमिंटन टीम पहली बार फाइनल पहुंची और अपनी पहली ही कोशिश में 14 बार की चैंपियन इंडोनेशिया को हराकर कमाल कर दिया। इस सफर में मलेशिया और डेनमार्क जैसी टीम को हराकर फाइनल तक का सफर कोई आसान नहीं था।

फाइनल में हारने वाली इंडोनेशिया टूर्नामेंट में अब तक कोई मैच नहीं हारी थी, लेकिन किदांबी श्रीकांत, एसएस प्रणॉय, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी सभी के धांसू खेल ने भारतीय फैंस को गर्व करने का मौका दिया। टीम के लिए विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं लक्ष्य सेन और किदांबी श्रीकांत के अलावा सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की दुनिया की आठवें नंबर की जोड़ी ने यादगार जीत दर्ज की।

फाइनल में लक्ष्य सेन ने जीता था पहला मैच
नॉकआउट चरण में लय हासिल करने के लिए जूझ रहे लक्ष्य ने सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए पहले एकल मैच में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए दुनिया के पांचवें नंबर के खिलाड़ी एंथोनी सिनिसुका गिनटिंग को 8-21 21-17 21-16 से हराकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई।

चार मैच पॉइंट बचाकर युगल में जीत

सात्विक और चिराग की देश की शीर्ष पुरुष युगल जोड़ी ने इसके बाद प्रतिकूल हालात में शानदार वापसी करते हुए दूसरे गेम में चार मैच प्वाइंट बचाए और मोहम्मद अहसन और केविन संजय सुकामुल्जो की जोड़ी को 18-21 23-21 21-19 से हराकर भारत की बढ़त को 2-0 किया।

शानदार श्रीकांत का आखिरी वार

दूसरे एकल में श्रीकांत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता जोनाथन क्रिस्टी को सीधे गेम में 48 मिनट में 21-15 23-21 से हराकर भारत को 3-0 की विजयी बढ़त दिला दी।

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